बेेरीपड़ाव। श्री अष्टादश भुजा माता महालक्ष्मी मंदिर के पावन प्रांगण में उस समय भक्ति, कौतूहल और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला, जब वरिष्ठ महामंडलेश्वर पूज्य श्री सोमेश्वर यति महाराज जी को एक अत्यंत पावन और दुर्लभ ग्रंथ ‘आदि शक्ति मां अवंतिका’ सप्रेम भेंट किया गया। इस अलौकिक भेंट के समर्पित होते ही पूरा मंदिर परिसर मां भगवती के जयकारों और आध्यात्मिक ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा।

इस गरिमामयी अवसर पर मां अवंतिका मंदिर समिति के अध्यक्ष सहित क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे। आयोजन में लक्ष्मण खाती, वरिष्ठ पत्रकार जीवन जोशी, वरिष्ठ समाजसेवी प्रमोद के. चंद, ख्याति प्राप्त समाजसेवी विक्की पाठक तथा मंदिर के कुशल व्यवस्थापक मोहन चन्द्र पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य भक्तजनों की मौजूदगी रही। सभी ने महाराज जी के चरणों में नमन कर उनका पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।
दिव्य पुस्तक को सप्रेम स्वीकार करते हुए पूज्य महामंडलेश्वर श्री सोमेश्वर यति महाराज जी ने मां जगदम्बा के विराट और ममतामयी स्वरूप का अत्यंत रसपूर्ण व भावविभोर कर देने वाला वर्णन किया। महाराज जी ने अमृतमयी वाणी में कहा कि मां जगदम्बा केवल सृष्टि की रचियता ही नहीं, अपितु संपूर्ण चर-अचर जगत का मूल प्राणतत्व हैं।
महाराज जी ने उद्बोधन में कहा, “मां अवंतिका और मां महालक्ष्मी उसी एक आदि शक्ति के करुणामयी स्वरूप हैं। मां का हृदय वात्सल्य का वह अथाह महासागर है, जो अपने शरणागत भक्त के समस्त क्लेशों, भयों और अंधकार को एक क्षण में हर लेता है। मां जगदम्बा जब कृपा दृष्टि डालती हैं, तो असंभव भी सहज संभव हो जाता है। उनकी भक्ति केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति का मार्ग नहीं, बल्कि जीव को परम शांति और आत्मिक प्रकाश की ओर ले जाने वाली अमर ज्योति है।”
महाराज जी के मुखारविंद से मां भगवती की महिमा का ऐसा सरस और मधुर वर्णन सुनकर उपस्थित सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उपस्थित प्रबुद्धजनों ने भी इस अवसर को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया। भक्ति, श्रद्धा और ज्ञान के इस पावन मिलन ने संपूर्ण आयोजन को सनातन संस्कृति और मां के अनन्य प्रेम का एक अद्वितीय उदाहरण बना दिया।
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