हल्द्वानी में मनी पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया नमन
पंडित गोविंद बल्लभ पंत के आदर्श राष्ट्र निर्माण की रीढ़: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
हल्द्वानी। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं ‘भारत रत्न’ पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती उत्तराखंड सहित पूरे देश में गरिमामय एवं भव्य रूप से मनाई गई। इस अवसर पर हल्द्वानी के तिकोनिया स्थित पंत पार्क में मुख्य श्रद्धांजलि सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
समारोह में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य रूप से प्रतिभाग कर पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान कार्यक्रम समिति के उत्तराखंड समन्वयक व पूर्व दर्जा राज्य मंत्री गोपाल सिंह रावत, समिति के उत्तराखंड प्रभारी राजेश कुमार, सह-संयोजक राजेश भट्ट सहित अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समारोह में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा देशभक्ति से परिपूर्ण मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं और पंडित जी के प्रेरक जीवन प्रसंगों को रेखांकित किया गया।
युवा पीढ़ी पंत जी के जीवन मूल्यों से प्रेरणा ले: मुख्यमंत्री सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लिए यह परम गर्व का विषय है कि उसने पंडित गोविंद बल्लभ पंत जैसी महान विभूति को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि देश के स्वाधीनता आंदोलन से लेकर नवभारत के प्रशासनिक ढांचे के निर्माण में पंत जी का योगदान अतुलनीय रहा है। वर्तमान पीढ़ी को उनके त्याग, दूरदर्शिता और राष्ट्रभक्ति से सीख लेकर देश सेवा में समर्पित होना चाहिए।

गोपाल सिंह रावत का भावपूर्ण उद्बोधन: कार्यक्रम समिति के उत्तराखंड समन्वयक एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री गोपाल सिंह रावत ने पंडित पंत के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी केवल एक महान राजनेता और कुशल प्रशासक ही नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय, समानता और स्वाभिमान के मजबूत संवाहक थे। उन्होंने पर्वतीय अंचल से उठकर राष्ट्रीय स्तर पर हिमालय जैसी अडिग और प्रेरक पहचान बनाई। ‘कुली बेगार’ जैसी दमनकारी कुप्रथा के उन्मूलन से लेकर ‘जमींदारी उन्मूलन’ तक, उन्होंने सदैव समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष किया। उनके आदर्श और जीवन मूल्य आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उनके दिखाए जनसेवा, सत्य और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलना ही उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है।”
उपस्थित वक्ताओं ने पंडित पंत के कृतित्व को याद करते हुए कहा कि एक प्रखर कानूनविद्, निडर स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी गृहमंत्री के रूप में देश की आंतरिक सुरक्षा और एकता को सुदृढ़ करने में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक, समिति के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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