प्रख्यात कथावाचक डॉ. पंकज मिश्र ‘मयंक’ से विस्तृत विशेष साक्षात्कार
लालकुआँ में श्री राम कथा का शुभारंभ गुरुवार 18 दिसम्बर को भव्य कलश यात्रा के साथ होने जा रहा है।
प्रसिद्ध कथा वाचक डा० पंकज मिश्र ‘मयंक’ के लालकुआँ पहुँचने पर बुधवार को श्रद्धालुओं द्वारा उनका आत्मीय एवं भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर एक भेंट वार्ता में डा० पंकज मिश्र मयंक ने श्री राम कथा के आध्यात्मिक, सामाजिक एवं नैतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि श्री राम कथा मानव जीवन को मर्यादा, सेवा और सदाचार के पथ पर अग्रसर करने वाली दिव्य प्रेरणा है।
प्रश्न : डॉ. पंकज मिश्र जी, श्री राम कथा आपके लिए क्या है एक धार्मिक अनुष्ठान या जीवन-दर्शन?
उत्तर : मेरे लिए श्री राम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन का सम्पूर्ण दर्शन है। यह कथा मनुष्य को यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी मर्यादा, संयम और करुणा को कैसे जीवित रखा जाए। श्रीराम का जीवन हर भूमिका में पुत्र, भाई, पति, राजा और मानव—एक आदर्श प्रस्तुत करता है।
प्रश्न : आप अक्सर कहते हैं कि “राम कथा समाज को जोड़ती है” इसका आशय क्या है?
उत्तर :राम कथा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह वर्ण, वर्ग, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से परे सभी को जोड़ती है। राम केवल अयोध्या के नहीं, बल्कि जन-जन के आराध्य हैं। कथा के माध्यम से समाज में समरसता, भाईचारा और लोकमंगल की भावना पुष्ट होती है।
प्रश्न : आज के तनावग्रस्त और भौतिकवादी युग में राम कथा कैसे मार्गदर्शन करती है?
उत्तर :आज मनुष्य के पास साधन तो हैं, पर शांति नहीं। श्री राम कथा बताती है कि संतोष, कर्तव्य और संयम ही वास्तविक सुख का आधार हैं। राम ने वनवास को भी स्वीकार किया और कभी शिकायत नहीं की यह आज के युग के लिए सबसे बड़ा संदेश है।
प्रश्न : युवा पीढ़ी के लिए श्री राम कथा का क्या महत्व है?
उत्तर : युवा वर्ग यदि श्रीराम के जीवन से कुछ सीख ले तो उनका जीवन स्वतः संवर सकता है।
श्रीराम हमें सिखाते हैं—
निर्णय क्षमता गुरु और माता-पिता का सम्मान
लक्ष्य के प्रति अडिग रहना आज के युवाओं को आदर्श और आत्मनियंत्रण की सबसे अधिक आवश्यकता है, जो राम कथा सहज रूप से देती है।
प्रश्न : माता सीता और हनुमान जी के चरित्र आज के समाज को क्या संदेश देते हैं?
उत्तर : माता सीता धैर्य, आत्मबल और नारी गरिमा की अद्भुत प्रतीक हैं। हनुमान जी सेवा, निष्ठा और अहंकार रहित शक्ति के उदाहरण हैं। इन दोनों चरित्रों के बिना राम कथा की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
प्रश्न : आपकी कथा शैली में शास्त्र और समकालीन जीवन का सुंदर समन्वय दिखता है यह कैसे संभव होता है?
उत्तर : शास्त्र तभी जीवंत होते हैं जब उन्हें आज की भाषा और परिस्थितियों से जोड़ा जाए। मैं प्रयास करता हूं कि राम कथा श्रोता के जीवन से संवाद करे, केवल मंच से उपदेश न बने।
प्रश्न : रामराज्य की अवधारणा को आप कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर : रामराज्य किसी राजनीतिक व्यवस्था का नाम नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और उत्तरदायित्व की भावना है। जहां शासक स्वयं को सेवक माने, वही रामराज्य है।
प्रश्न : श्री राम कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन में क्या परिवर्तन आता है?
उत्तर : राम कथा मन को शुद्ध करती है, विचारों को संयमित करती है और आचरण को पवित्र बनाती है। यह आत्मा का संस्कार है, जो धीरे-धीरे पूरे जीवन को प्रकाशित कर देता है।
प्रश्न : समाज और श्रद्धालुओं के लिए आपका संदेश?
उत्तर : मेरा संदेश सरल है
“राम को केवल मंदिर में नहीं, अपने व्यवहार में उतारिए।”
यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य को रामभाव से निभा ले, तो समाज स्वयं सुंदर बन जाएगा।
डॉ. पंकज मिश्र ‘मयंक’ की श्री राम कथा आस्था, विवेक और सामाजिक चेतना का अनुपम संगम है। उनकी वाणी में शास्त्र की गंभीरता और जनजीवन की सरलता साथ-साथ प्रवाहित होती है। “श्री राम कथा जो सुनी नहीं जाती, जी जाती है।”
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