समस्याओं से मुक्ति का महामंत्र: सत्य साधक ‘गुरु जी’ द्वारा माँ पीताम्बरी का अखंड हवन-यज्ञ और लोक कल्याण का महासंकल्प

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समस्याओं से मुक्ति का महामंत्र: सत्य साधक ‘गुरु जी’ द्वारा माँ पीताम्बरी का अखंड हवन-यज्ञ और लोक कल्याण का महासंकल्प

प्रमुख अंश:

 जीवन लक्ष्य:माँ पीताम्बरी (बगलामुखी) की साधना व सिद्धि के माध्यम से लोक कल्याण करना और नशामुक्त समाज का निर्माण करना।

 तपस्या का प्रतिफल: अपनी 30 वर्षों की साधना यात्रा में लाखों परिवारों के जीवन में ला चुके हैं सकारात्मक बदलाव।

 विशाल अनुष्ठान:अब तक उत्तर भारत के 3,000 से अधिक पौराणिक धर्मस्थलों एवं शक्तिपीठों में माँ पीताम्बरी की साधना व अखंड हवन-पूजन कर चुके हैं संपन्न।

हल्द्वानी (नैनीताल)। कलिकाल (कलियुग) में बड़ी से बड़ी समस्याओं से त्वरित मुक्ति पाने तथा जीवन में सुख, समृद्धि, यश-वैभव, सम्मान व परम शांति प्राप्त करने के लिए माँ पीताम्बरी देवी (बगलामुखी) का अखंड हवन-यज्ञ सबसे सहज, उत्तम और आसान मार्ग है। यह मंगलकारी विचार  एक परिचर्चा के दौरान सत्य साधक “गुरु जी” ने श्रद्धालु भक्तों के बीच व्यक्त किए।

समस्याओं का भटकाव और माँ की करुणा

अपने उद्बोधन में गुरु जी ने स्पष्ट किया कि मानव जीवन में यदि समस्याएं हैं, तो उनका समाधान भी निश्चित है। अक्सर समस्याग्रस्त व्यक्ति अज्ञानतावश अलग-अलग विधि-विधानों में भटकता रहता है, जिससे उसके समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती है और समस्याएं विकट हो जाती हैं।

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गुरु जी ने बताया कि दश महाविद्याओं में आठवीं प्रमुख महाविद्या माँ पीताम्बरी (बगलामुखी) मूलतः तंत्र की देवी हैं।

 साधना के दो मार्ग: कई साधक माँ के ‘उग्र स्वरूप’ की साधना कर मारक, सम्मोहन, वशीकरण या उच्चाटन जैसी सिद्धियां प्राप्त करते हैं। वहीं, कुछ साधक माँ के **’पीताम्बरी स्वरूप’ (करुणा की देवी) की आराधना करते हैं।

  यद्यपि दोनों मार्ग कठिन हैं, लेकिन सच्ची श्रद्धा रखने वाला कोई भी व्यक्ति पीताम्बरी स्वरूप की साधना कर माँ की पावन करुणा को सिद्ध कर सकता है और लोक कल्याण के योग्य बन सकता है।

अखंड हवन-यज्ञ: एक आध्यात्मिक विज्ञान

गुरु जी के अनुसार, माँ पीताम्बरी का अखंड हवन-यज्ञ केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक **आध्यात्मिक विज्ञान** है। माँ के नाम और मंत्र का जप करते हुए 10 से 12 घंटों तक अखंड हवन करने मात्र से विकट परिस्थितियों में घिरे लोगों पर माँ की कृपा बरसती है। इसके प्रभाव से न केवल श्रद्धालु भक्तों का, बल्कि समूचे क्षेत्र के जीव मात्र का कल्याण होता है और चारों ओर मंगलमय वातावरण निर्मित होता है।

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30 वर्षों की साधना और अयोध्या का ऐतिहासिक अनुष्ठान

सत्य साधक “गुरु जी” बीते तीन दशकों से अपनी साधना की शक्ति से दुखी और परेशान लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

 कठोर तप: किसी भी हवन-यज्ञ से पूर्व गुरु जी समस्या की गंभीरता के अनुसार तीन दिन से लेकर तीन माह तक की अखंड साधना करते हैं।

 राम मंदिर निर्णय से पूर्व अनुष्ठान:यह उल्लेखनीय है कि अयोध्या में श्री राम मंदिर पर ऐतिहासिक निर्णय आने से ठीक पूर्व, गुरु जी ने वहाँ हनुमान गढ़ी में 36 घंटों की कठोर अखंड साधना के बाद 12 घंटों का विशाल हवन-यज्ञ संपन्न किया था।

देशभर के तीर्थों में गूंजे माँ के मंत्र

अपनी तीन दशक की यात्रा में गुरु जी ने देवभूमि उत्तराखंड सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, गुजरात और महाराष्ट्र के तीन हजार से अधिक तीर्थों में अनुष्ठान किए हैं।

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 प्रमुख स्थल: मध्य प्रदेश में दतिया; उत्तराखंड में बद्रीनाथ, मलयनाथ मंदिर (डीडीहाट), हरिद्वार, ऋषिकेश, पाताल भुवनेश्वर, भद्रकाली धाम (कमस्यार घाटी), शीतला माता मंदिर (रानीबाग), द्रोणागिरी, कालीमठ, काली चौड़; उत्तर प्रदेश में अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, काशी, प्रयागराज, और विंध्यवासिनी।

 नदियों के तट पर तप: अकेले श्रावस्ती जनपद में राप्ती/ताप्ती नदी के तट पर उन्होंने दिन और रात्रिकाल में दो हजार हवन संपन्न कराए हैं।

हवन की विशिष्ट सामग्री

इन अनुष्ठानों में प्रकृति से जुड़ी शुद्ध सामग्रियों का उपयोग होता है। सामान्यतः जौ, तिल, राई, कपूर, हींग, इलायची, लौंग, सेमल के फूल, टेसू, मदार, काली मिर्च, बरगद, कमलगट्टा और शुद्ध देसी घी से आहुतियां दी जाती हैं। विशेष उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कुछ अत्यंत विशिष्ट सामग्रियों का भी प्रयोग किया जाता है।

विशेष

सत्य साधक गुरु जी वर्ष भर किसी न किसी पवित्र स्थल पर माँ पीताम्बरी की साधना में लीन रहते हैं। समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाने, नशामुक्त समाज की स्थापना करने और पीड़ित मानवता की सेवा करने के लिए उनका यह अनुष्ठान अनवरत जारी है।

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