“हल्दूचौड़ की पावन धरती पर तप, त्याग और करुणा का महोत्सव साधक हरीश काण्डपाल की वानप्रस्थ वैराग्य साधना पूर्णता की ओर”

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हल्दूचौड़ / बच्ची धर्मा
हल्दूचौड़ क्षेत्र की शांत, सुरम्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत धरती इन दिनों एक दिव्य साधना-यात्रा की साक्षी बन रही है। बच्ची धर्मा निवासी साधक हरीश काण्डपाल द्वारा वर्ष 2021 से प्रारम्भ की गई वानप्रस्थ वैराग्य की 50 माह की कठोर व्रत साधना अब अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर है। यह साधना केवल एक व्यक्ति की तपस्या नहीं, बल्कि समूचे समाज के लिए त्याग, संयम, करुणा और गौ-भक्ति का जीवंत संदेश है।
इसी पावन अवसर पर साधक की कुटिया में 29 जनवरी 2026 से 1 फरवरी 2026 तक चार दिवसीय दिव्य महायज्ञ एवं अनुष्ठान का भव्य आयोजन सुनिश्चित हुआ है। यह आयोजन तप, यज्ञ, सेवा और भक्ति का ऐसा संगम होगा, जिसमें सहभागी बनकर श्रद्धालु स्वयं को धन्य अनुभव करेंगे।
महायज्ञ अनुष्ठान का पावन क्रम
🔱 29 जनवरी 2026
इस दिन आध्यात्मिक वातावरण की नींव रखी जाएगी।
भद्र मंडल स्थापना
हवन कुंड निर्माण
यज्ञ से संबंधित प्रारम्भिक वैदिक कर्मकाण्ड
🔱 30 जनवरी 2026
प्रातः 8 बजे से पंचांग पूजन
आवदेव श्राद्ध एवं अन्य वैदिक अनुष्ठान
मध्याह्न पश्चात पवित्र हवन
🔱 31 जनवरी 2026
प्रातः 8 बजे से हवन एवं पूर्णाहुति (मध्याह्न तक)
अपराह्न 2 बजे गौमाता धाम, हल्दूचौड़ (परमा गौआश्रम) के लिए प्रस्थान गौमाता पूजन अधिक से अधिक गौमाताओं को पूड़ी, हलवा, फल, गुड़ व हरी घास अर्पण
समस्त भक्तों द्वारा गौमाताओं की भव्य महाआरती
यह क्षण केवल आरती का नहीं, बल्कि उस दिव्य अनुभूति का होगा जहाँ श्रद्धा अपने चरम पर होगी। शास्त्रों में वर्णित है कि एक गौमाता के शरीर में तैंतीस कोटि देवताओं का वास होता है। जहाँ गौमाताएं झुंड में रंभाती हैं, वहाँ भगवान श्रीकृष्ण राधारानी सहित बंशी बजाते हुए नंगे पाँव दौड़े चले आते हैं, और वही स्थान साक्षात गोलोक धाम बन जाता है। जब शुद्ध भाव, निःस्वार्थ श्रद्धा और प्रेम एकत्र होते हैं, तब प्रभु के अवतरण में कोई संदेह नहीं रहता।
🔱 1 फरवरी 2026
कुटिया में प्रातः संतों का पाद प्रक्षालन, पूजन, भोजन व दान-दक्षिणा कन्या पूजन ब्राह्मण पूजन एवं गोदान
मध्याह्न 1 बजे के बाद विशाल भंडारे का आयोजन
आवाहन
यह आयोजन केवल एक साधक की साधना का समापन नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आध्यात्मिक उत्सव है।
सभी श्रद्धालुजनों से विनम्र निवेदन है कि तन-मन- भाव से सहयोग कर, अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनें और इस पुण्य अवसर के साक्षी बनकर जीवन को धन्य करें।
क्योंकि जब भक्त का भाव शुद्ध होता है, श्रद्धा अडिग होती है 
तो भगवान देर नहीं करते।