आज दिनांक 21फरवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष पर जजफार्म पीलीकोठी वार्ड 51 व 52 का दुर्गापाल गार्डन रविवार बाजार पीलीकोठी में सकल सनातन समिति द्वारा विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में सज्जन शक्ति को संगठित कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का आवाह्न किया गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में देश भर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किये जा रहे हैं। इसी क्रम में आज दुर्गापाल गार्डन रविवार बाजार पीलीकोठी में श्री दीप विष्ट के संयोजकत्व एवं विमल पाण्डेय के कुशल संचालन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत बाल प्रमुख डॉ. शील निधि, मातृशक्ति के रूप डॉ० प्रोफेसर शुभ्रा काण्डपाल , आध्यात्मिक वक्ता डॉ. दुर्गेश्वर दत्त त्रिपाठी रहे
मुख्य वक्ता डॉ. शीलनिधि ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉक्टर हेडगेवार ने संपूर्ण हिंदू समाज के संगठन के उद्देश्य से की गई थी। संघ ने विपरीत परिस्थितियों में भी हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए निरंतर कार्य किया है ।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी विचार और भारतीय संस्कारों के माध्यम से भारत को अग्रणी और विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता। भारत प्राचीन काल से ही हिंदू राष्ट्र है। उसे हिंदू राष्ट्र अलग से बनाने की आवश्यकता नहीं है। आज कुछ लोग हिन्दू समाज को जातियों में बांटकर तोड़ने का काम कर रहे हैं, जबकि प्राचीन काल से ही वर्ण व्यवस्था व्यक्ति के जन्म के आधार पर न होकर कार्य के आधार निर्धारित थी। प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर वर्ण व्यवस्था विद्यमान है। जैसे-जैसे व्यक्ति के कार्यों के स्वरूप में परिवर्तन होता है उसी प्रकार वर्ण व्यवस्था भी परिवर्तित होती रहती है।
उन्होंने बताया कि हमें अपनी मातृभूमि व अपने देश के प्राचीन गौरव को बचाने की आवश्यकता है, इसीलिए सभी हिंदुओं को संगठित रहने का आवाहन किया।
प्रोफेसर शुभ्रा काण्डपाल ने कहा कि सनातन परंपरा व हिंदू धर्म के उत्थान के लिए हमें संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है।
पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन में मातृ शक्ति की भूमिका , पूजनीय से संघ चालक श्री मोहन भागवत जी के द्वारा ये संकल्पना प्रदान की गई है, कि पांच आयामों में कार्य करके किस प्रकार राष्ट्र निर्माण का पुनीत कार्य महिलाएं कर सकने में अद्वितीय भूमिका निभा सकती है, ये पांच आयाम है, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य सामाजिक समरसता तथा स्व आधारित जीवन, मां चूंकि प्रथम शिक्षिका है बालक की , तो वह बालक व्यक्तित्व निर्माण में प्रमुख निभा कर देश के भावी कर्णधारों को राष्ट्र सेवा हेतु तैयार कर सकती है।
बच्चों को बचपन से ही अनौपचारिक शिक्षण, सकारात्मक अनुशासन और स्वयं परिवार का वातावरण उन्नत रखकर बालक का आध्यात्मिक विकास और मूल्यपरक जीवन की आधारशिला सिर्फ एक मां कर सकती है।
आध्यात्मिक वक्ता डॉ. दुर्गेश्वर त्रिपाठी ने अनेकता में एकता की बात करते हुए कहा कि हम सब एक हैं । हमें अपने समाज को जोड़ने की आवश्यकता है। समस्त ज्ञान का मूल आधार वेद है। उन्होंने बताया कि ईश्वर का वास इस संसार में सर्वत्र है। हमें अपने मन वचन कर्म और वाणी से किसी भी प्राण मात्र को कष्ट ना पहुंचाए लेकिन आवश्यकता पड़ने पर हमें धर्म की रक्षा करने के लिए शत्र का भी प्रयोग करना पड़ता है। भगवान राम ने रामराज्य की स्थापना भी कि और धर्म की रक्षा करने के लिए धनुष बाण भी उठाया। हमारा सनातन वैज्ञानिक शैली पर आधारित है। इसलिए सनातन की रक्षा करना हम सभी सनातनियों का कर्तव्य है।
हिन्दू सम्मेलन में सिंथिया के बीजीबिज स्कूल के नन्हे मुन्ने बच्चों ने व हर गोविंद सुयाल इन्टर कालेज कुसुमखेड़ा के छात्र-छात्राओं ने देश भक्ति गीत कुमाऊनी नृत्य की सुन्दर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गयी और पर्वतीय सांस्कृतिक मंच की टीम ने कुमाऊंनी होली की सुन्दर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई।
विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान सामाजिक, आध्यात्मिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सज्जन शक्ति का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में जिला कार्यवाह राहुल जोशी, नगर प्रचारक प्रभाकर, जिला शारीरिक प्रमुख सूरज , जिला परिवार प्रबोधन प्रमुख विनीत टण्डन, सहजिला बौद्धिक प्रमुख कमलेश , नगर कार्यवाह प्रकाश, उपनगर कार्यवाह नितिन, नगर प्रचार प्रमुख डॉ. नवीन शर्मा, सह संयोजक विशम्बर काण्डपाल, कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत जी, मेयर गजराज बिष्ट, समाज सेवी मनोज पाठक, पार्षद रेखा बिनवाल, पार्षद दीपक बिष्ट,देवकी जोशी , उमेश बिनवाल, शेखरान्नद पाण्डेय,अशोक पपनै, रंजन शाह, भूपेश पंत, हेम अवस्थी, अरविन्द डंगवाल,पूरन रावत, भूवन पाण्डेय समेत आदि मौजूद रहे।
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