समाज, संस्कृति और साहित्य के प्रखर पुरोधा स्व० भगवान बल्लभ पंत का महाप्रयाण

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गंगावली का एक चमकता सितारा अस्त: प्रकृति, संस्कृति और समाज के सच्चे साधक स्व० भगवान बल्लभ पंत का निधन

गंगोलीहाट/पिथौरागढ़: जनपद पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट स्थित चिटगल गाँव के माटी के लाल, प्रख्यात समाजसेवी, साहित्यकार और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री भगवान बल्लभ पंत अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार, 5 मई को नोएडा में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अपने परिजनों के साथ रहकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। उनके निधन की दुःखद सूचना मिलते ही पूरे गंगावली क्षेत्र और पिथौरागढ़ जनपद में शोक की लहर दौड़ गई है।

सादगी और निश्छलता की प्रतिमूर्ति

अपने नाम के ही अनुरूप, भगवान की भांति निश्छल और पवित्र हृदय वाले श्री पंत मानवीय गुणों की एक अद्भुत मिसाल थे। वे एक कर्तव्यनिष्ठ व सत्यनिष्ठ व्यक्ति थे, जिन्होंने आजीवन अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया। जन-समस्याओं के समाधान के लिए वे सदैव एक सजग प्रहरी की तरह संघर्षरत रहे और अपने पैतृक गाँव ‘चिटगल’ के विकास में उन्होंने अतुलनीय भूमिका निभाई।

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भाजपा के आधारस्तंभ और जनप्रिय नेता

श्री पंत आजीवन भारतीय जनता पार्टी के उच्च आदर्शों के प्रति समर्पित रहे। जनपद पिथौरागढ़ के दुर्गम क्षेत्रों में भाजपा की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने और पार्टी को मजबूती से स्थापित करने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। वे केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि जनता के सुख-दुख के सच्चे साथी थे।

साहित्य के धनी और तीर्थों को पहचान दिलाने वाले भगीरथ

राजनीति से इतर, वे एक बेहद लोकप्रिय लेखक और साहित्य के प्रखर हस्ताक्षर थे। सांस्कृतिक मंचों पर उनकी सक्रिय और जीवंत भागीदारी सदैव क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रही। अपनी प्रभावशाली लेखनी के माध्यम से उन्होंने क्षेत्र के गुमनाम तीर्थों को प्रकाश में लाने का जो पुनीत कार्य किया, वह वंदनीय है। विश्व प्रसिद्ध गुफा ‘पाताल भुवनेश्वर’ और सिद्धपीठ ‘हाट कालिका’ जैसे पावन तीर्थों को व्यापक पहचान दिलाने में उनकी साहित्यिक रचनाओं का विशेष एवं अप्रतिम योगदान रहा है।

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प्रकृति और आध्यात्म का अनूठा संगम

एक पर्यावरण प्रेमी के रूप में उनकी ख्याति सर्वविदित थी। श्री पंत ने पर्यावरण संरक्षण को आध्यात्म से जोड़कर एक नई राह दिखाई। उन्होंने वनों को देवी को समर्पित करने की प्राचीन आध्यात्मिक परम्परा को बल दिया। इस अनूठी पहल के माध्यम से उन्होंने आम जनमानस के सम्मुख प्रकृति और शक्ति (आध्यात्म) दोनों की गूढ़ महत्ता को बड़ी ही सरलता से प्रस्तुत किया, जिससे वनों के संरक्षण को एक धार्मिक और भावनात्मक संबल मिला।

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अपूरणीय क्षति:

स्व० भगवान बल्लभ पंत जी का महाप्रयाण केवल एक राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण और संपूर्ण गंगावली समाज की एक अपूरणीय क्षति है। उनका संघर्षमय जीवन, उनकी लेखनी और उनका प्रकृति प्रेम आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।वे अपने पिछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये है

गंगावली क्षेत्र उनके द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान को सदैव अपनी स्मृतियों में संजो कर रखेगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में सर्वोच्च स्थान प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति दें।

**ॐ शांति!**

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