हरित क्रांति की ओर बड़ा कदम: सेंचुरी पल्प और पंतनगर कृषि विवि के बीच 200 एकड़ में पौधरोपण का ऐतिहासिक करार

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​लालकुआँ। पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को एक साथ साधने की दिशा में सेंचुरी पल्प एवं पेपर मिल और विश्वविख्यात गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर ने हाथ मिलाया है। कच्चे माल की आत्मनिर्भरता और हरित आवरण को बढ़ावा देने के लिए दोनों संस्थानों के बीच 31 मार्च 2026 को 200 एकड़ भूमि पर वृहद स्तर पर पौधरोपण हेतु एक दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

​इन अधिकारियों के बीच हुआ करार

यह महत्वपूर्ण समझौता सेंचुरी मिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री अजय कुमार गुप्ता और विश्वविद्यालय के उप नियंत्रक (फार्म) श्री सत्य प्रकाश कुरील के बीच संपन्न हुआ। इस मौके पर विश्वविद्यालय की ओर से मुख्य महाप्रबंधक डॉ. टी.पी. सिंह व महाप्रबंधक डॉ. आशुतोष सिंह मौजूद रहे। वहीं, सेंचुरी प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्य वित्त अधिकारी श्री महेंद्र कुमार हरित, उपाध्यक्ष श्री नरेश चंद्रा, श्री अमित गंगवाल और श्री रवि प्रताप सिंह ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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​रोजगार और कच्चे माल की आपूर्ति होगी सुनिश्चित

इस अवसर पर सेंचुरी मिल के सीईओ अजय कुमार गुप्ता ने इस पहल को भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “सेंचुरी मिल और पंतनगर विश्वविद्यालय का यह साझा प्रयास न केवल पर्यावरण के लिए संजीवनी बनेगा, बल्कि पेपर मिल के लिए कच्चे माल की सुचारू आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, नर्सरी निर्माण और पौधारोपण जैसी गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।” उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण के प्रति मिल की कटिबद्धता का प्रमाण बताया।

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​2026-27 के लिए 2.50 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य

सेंचुरी मिल के पर्यावरण संरक्षण अभियानों का ब्यौरा देते हुए उपाध्यक्ष नरेश चंद्रा ने बताया कि मिल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 2.22 करोड़ पौधे लगाने का उत्कृष्ट कार्य किया है।
​आधुनिक मिस्ट चैंबर: उच्च गुणवत्ता वाले पौधों के विकास और विशेष रूप से यूकेलिप्टिस के उन्नत क्लोन तैयार करने के लिए एक आधुनिक ‘मिस्ट चैंबर’ भी स्थापित किया गया है।

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​आगामी लक्ष्य: उन्होंने घोषणा की कि

आगामी वर्ष 2026-27 के लिए मिल ने 2.50 करोड़ पौधे रोपने का महात्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे पूरा करने के लिए प्रबंधन युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है।

​उद्योग-कृषि गठजोड़ की मिसाल

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और उद्योग जगत का यह गठजोड़ क्षेत्र के सतत विकास का एक बेहतरीन मॉडल है। इस समझौते से जहां एक ओर खाली पड़ी भूमि का पर्यावरण संवर्धन के लिए सदुपयोग होगा, वहीं दूसरी ओर कृषि आधारित औद्योगिक सहयोग की एक नई परंपरा की शुरुआत होगी।

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