बिंदुखत्ता की निर्णायक हुंकार: हजारों की ऐतिहासिक महारैली के बाद सरकार को अल्टीमेटम, अप्रैल में आर-पार के आंदोलन की चेतावनी

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लालकुआँ/हल्द्वानी, 18 फरवरी 2026।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की वर्षों पुरानी मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बुधवार को हजारों लोगों की मौजूदगी में निकली ऐतिहासिक महारैली ने इस आंदोलन को जनज्वार में बदल दिया। क्षेत्र की सड़कों पर उमड़े जनसैलाब ने एक स्वर में सरकार से तत्काल राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करने की मांग की और स्पष्ट चेतावनी दी कि अब टालमटोल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

महारैली में बदला आंदोलन

बिंदुखत्ता संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर आयोजित इस महारैली में क्षेत्र के हजारों महिला-पुरुष, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। रैली ने यह संकेत दे दिया कि दशकों से लंबित यह मांग अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है।
रैली के समापन पर प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल शासनादेश जारी करने की मांग की। जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि ज्ञापन को उसी दिन शासन को प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

नेताओं ने सरकार को घेरा

जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा—
“बिंदुखत्ता की जनता दशकों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। अब सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए तुरंत राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करनी चाहिए। जनता की आवाज को अनसुना करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।”
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए चेताया—
“यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। बिंदुखत्ता के विकास और हक की लड़ाई को हम अंजाम तक पहुंचाकर रहेंगे। अब टालमटोल नहीं चलेगी।”
वरिष्ठ नेता हरीश दुर्गापाल ने इसे सामाजिक न्याय का प्रश्न बताते हुए कहा—
“राजस्व गांव का दर्जा मिलते ही भूमि, पट्टों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होगा। यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का सवाल है।”
भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश मैखुरी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा—
“यदि सरकार ने जल्द अधिसूचना जारी नहीं की तो सड़क से सदन तक संघर्ष तेज होगा। जनता अब प्रतीक्षा नहीं, निर्णय चाहती है।”
संघर्ष के अग्रणी चेहरा बहादुर सिंह जंगी ने ऐलान किया—
“जब तक राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है—या अधिकार मिलेगा, या संघर्ष और तेज होगा।”
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान समस्या
ज्ञापन में समिति ने उल्लेख किया कि बिंदुखत्ता क्षेत्र के निवासी चंदवंश और कत्यूरी राजवंश के समय से ‘गोठ खत्तों’ के माध्यम से भाबरी क्षेत्र में निवास करते आए हैं। बावजूद इसके, आजादी के दशकों बाद भी क्षेत्र को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिल सका है।
राजस्व गांव न होने के कारण क्षेत्रवासी केंद्र और राज्य सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। भूमि संबंधी अधिकार, पट्टों का नियमितीकरण, सड़क, पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थायी व्यवस्था जैसी समस्याएं आज भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं।

अप्रैल में धरने का अल्टीमेटम

संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र शासनादेश जारी नहीं किया गया तो अप्रैल माह में हल्द्वानी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। समिति ने कहा कि आंदोलन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

शांतिपूर्ण लेकिन प्रचंड संदेश

महारैली के दौरान पूरे क्षेत्र में जोश, अनुशासन और एकजुटता का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। प्रशासन की मुस्तैदी के बीच कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, लेकिन जनता का संदेश साफ था अब प्रतीक्षा नहीं, परिणाम चाहिए।
बिंदुखत्ता की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। दशकों से लंबित यह मांग क्या जल्द पूरी होगी या संघर्ष और तीखा होगा यह आने वाला समय तय करेगा।

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