लालकुआँ: कड़कड़ाती ठंड में चाय की चुस्की के साथ ‘उत्तरायणी कौतिक’ पर चर्चा, बिष्ट और नैनवाल नयाल बंधुओं ने किया मंथन

ख़बर शेयर करें

​लालकुआँ (ब्यूरो):
कुमाऊँ के सबसे बड़े लोक पर्व ‘उत्तरायणी’ (घुघुतिया त्यार) की आहट अब तराई के क्षेत्रों में भी सुनाई देने लगी है। शुक्रवार शाम लालकुआँ में कड़कड़ाती ठंड के बीच चाय की थड़ी पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने उत्तरायणी मेले की भव्यता और तैयारियों को लेकर विशेष चर्चा की।
​मकर संक्रांति का पर्व नजदीक आते ही क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। इसी कड़ी में आज शाम लालकुआँ के मुख्य बाजार क्षेत्र में एक अनौपचारिक बैठक हुई। इस संवाद में दीवान सिंह बिष्ट, नारायण सिंह बिष्ट, हरीश नैनवाल और दीपू नैनवाल शामिल हुए। चाय की चुस्की के साथ इन सभी ने पहाड़ की लोक संस्कृति और आगामी उत्तरायणी मेले की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
​चर्चा के दौरान दीवान सिंह बिष्ट और नारायण सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तरायणी केवल एक मेला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पहचान का प्रतीक है। वहीं, हरीश नैनवाल और दीपू नैनवाल ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे आधुनिकता के दौर में अपनी परंपराओं को सहेजा जाए और नई पीढ़ी को इससे जोड़ा जाए।
​इस दौरान यह चर्चा भी हुई कि लालकुआँ जैसे व्यस्त शहर में भी पहाड़ की धड़कन महसूस की जा सकती है, जब लोग एक साथ बैठकर अपनी जड़ों से जुड़े त्योहारों पर बात करते हैं। ठंड के बावजूद चर्चा के दौरान सभी का उत्साह देखते ही बनता था।