श्री हंस सत्संग भवन में रक्तदान शिविर आयोजित, सेवा और साधना का दिया गया संदेश

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नई दिल्ली। पूर्वी पंजाबी बाग स्थित श्री हंस सत्संग भवन में आज श्री गुरु महाराज जी की प्रेरणा से मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस पुनीत अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं समाजसेवियों ने भाग लेकर रक्तदान किया और मानव सेवा के इस महान कार्य में अपनी सहभागिता निभाई।
शिविर का समापन परम पूज्य, ममतामयी माता श्री अमृता जी की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को सेवा, साधना और मानवता के मार्ग पर चलने का प्रेरक संदेश दिया।
माता श्री अमृता जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है जब वह अपने जीवन को सेवा और साधना के मार्ग पर समर्पित करता है। रक्तदान जैसे कार्य केवल सामाजिक सेवा ही नहीं बल्कि करुणा, प्रेम और मानवता की सच्ची अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि गुरु–शिष्य का संबंध एक पवित्र आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें समर्पण, विश्वास और प्रेम का होना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर महात्मा सत्य बोधानन्द जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है। जब मनुष्य अपने भीतर सेवा और करुणा की भावना जागृत करता है, तभी उसकी साधना पूर्ण होती है।
वक्ताओं ने कहा कि साधना के बिना जीवन अधूरा और असंतुलित हो सकता है। साधना से तात्पर्य आत्मविकास, ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास से है, जो मनुष्य को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। नियमित साधना से जीवन अधिक संतुलित, शांतिपूर्ण और अर्थपूर्ण बनता है।
रक्तदान शिविर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने यह संदेश दिया कि मानव सेवा ही सच्ची साधना है और समाज के कल्याण के लिए ऐसे सेवा कार्य निरंतर होते रहने