​हिमालय के आँचल में छिपा ‘ब्रह्मास्त्र’: वो दिव्य क्षेत्र जहाँ स्वयं महादेव ने खोले माँ बगलामुखी के रहस्य!

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हिमालय के आँचल में छिपा ‘ब्रह्मास्त्र’: वो दिव्य क्षेत्र जहाँ स्वयं महादेव ने खोले माँ बगलामुखी के रहस्य!

​[विशेष रिपोर्ट | माँ बगलामुखी जयंती]

​माँ बगलामुखी जयंती के पावन अवसर पर, आइए हम आपको एक ऐसी यात्रा पर ले चलते हैं, जो न केवल आस्था की है, बल्कि पौराणिक रहस्यों की गहराइयों को भी छूती है। दस महाविद्याओं में से एक, माँ बगलामुखी का वो प्राचीन धाम, जिसका वर्णन पुराणों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, देवताओं की भूमि उत्तराखण्ड के केदारखण्ड में स्थित है। यह ‘बगलाक्षेत्र’ युगों-युगों से परम पूज्यनीय है और पवित्र पहाड़ों की गोद में बसा एक ऐसा मनोहारी स्थल है, जहाँ पहुँचकर हर भक्त दिव्य लोक की अनुभूति करता है।

​हालाँकि भारतभूमि में माँ बगलामुखी के कई प्राचीन और सिद्ध स्थल हैं, लेकिन हिमालय के आँचल में स्थित माँ बगलामुखी क्षेत्र का महत्व पौराणिक कथाओं में सर्वाधिक माना गया है। इसकी पौराणिकता का आधार स्वयं वेद-व्यास द्वारा रचित पुराणों में सुन्दर शब्दों में वर्णित है।

​स्कंद पुराण में वर्णित शिव-पार्वती संवाद: केदारखण्ड का गुप्त रहस्य

​इस दिव्य क्षेत्र की विराट महिमा का सबसे प्रमाणिक वर्णन स्कंद पुराण के ‘केदारखण्ड महात्म्य’ में मिलता है। केदारखण्ड के 45वें अध्याय में एक अत्यंत मार्मिक और रहस्यमयी दृश्य सामने आता है, जब स्वयं भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती को इस क्षेत्र के गुप्त रहस्यों का उद्घाटन करते हैं।

​महादेव माँ पार्वती से कहते हैं कि यह एक अत्यंत “सुन्दर क्षेत्र” है, जो चार योजन लंबा और दो योजन चौड़ा है।

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​भिल्गणा नदी के समीप: एक ‘परम गोपनीय’ तीर्थ

​पवित्र भिल्गणा नदी के समीप स्थित इस पावन स्थल के बारे में महादेव कहते हैं, “हे देवी, यह पावन स्थल परम गोपनीय है। तुम्हारे कल्याणकारी प्रेम के वशीभूत होकर मैं तुम्हें हिमालय के इस दुर्लभ तीर्थ की महिमा बताता हूँ। भिल्लगणा के दक्षिण भाग में उत्तम बगलाक्षेत्र है।”

​महादेव आगे बताते हैं कि यह क्षेत्र न केवल माँ बगलामुखी का निवास है, बल्कि यह अनेक अन्य तीर्थों से भी युक्त है। यहाँ महादेव के ‘नाना पिण्डी स्वरूप’ (विभिन्न प्रकार की पिण्डियां) शोभित हैं। ऐसी मान्यता है कि जिसके दर्शन मात्र से मनुष्य सीधे देवी के नगर में वास करता है।

​ब्रह्मास्त्र विद्या: स्मरण मात्र से शत्रु पंगु

​शिवजी माता पार्वती को आगे बतलाते हैं कि “महादेवी बगला, सभी तन्त्रों में प्रसिद्ध हैं।” शत्रुओं का स्तम्भन करने वाली माँ बगला ‘ब्रह्मास्त्र विद्या’ के रूप रूप में विख्यात हैं। पुराणों के अनुसार, इनके केवल स्मरण मात्र से शत्रु भी पंगु हो जाता है:

​बगला तु महादेवी सर्वतन्त्रेषु विश्रुता।

ब्रह्मास्त्रविद्या विख्याता यस्या स्मरणमात्रेण शत्रुः पङ्गुर्भवेद्धवम्॥

तत्स्थानं तु मया प्रोक्तं सर्वकामफलप्रदम्॥

​अर्थात्, यह बगला क्षेत्र सभी कामनाओं का फल देने वाला है।

​कठोर साधना और सिद्धियाँ: आकाशचारिणी सिद्धि

​स्कंदपुराण के केदारखंड में इस क्षेत्र की अलौकिक महिमा का बखान करते हुए भगवान शिव ने यहाँ की कठोर साधना और उसके फलों के बारे में बताया है। वे कहते हैं कि “यहाँ सात रात निराहार रहकर (भोजन त्यागे) माँ बगलामुखी के मंत्र का जप करने से, साधक को अत्यंत दुर्लभ ‘आकाशचारिणी सिद्धि’ की प्राप्ति होती है।”

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​यह क्षेत्र इतना फलदायी है कि सभी यज्ञों में जो पुण्य प्राप्त होता है और सभी तीर्थों में जो फल प्राप्त होता है, वह सब केवल इस बगला देवी के दर्शन से ही मिल जाता है।

​क्षेत्र के सबसे गहरे रहस्य: अदृश्य शक्तियां और गरजता महासिंह

​पुराणों के अनुसार, माँ बगलामुखी के इस पौराणिक क्षेत्र में कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जो आम मनुष्य की कल्पना से परे हैं:

​पुण्यप्रमोदिनी धारा और विष्णु मूर्ति: देवी के दक्षिण भाग में ‘पुण्यप्रमोदिनी धारा’ बहती है, जिसके उत्तरी तट पर भगवान विष्णु की चार भुजावाली अत्यंत प्राचीन मूर्ति स्थापित है। इसका दर्शन करने से मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है, मानो उसने सारा पुण्य कर्म कर लिया हो।

​’त्रिशिरा’ देवी और गरजता सिंह: महादेव जी महादेवी को एक अत्यंत ‘गुप्त रहस्य’ बताते हुए कहते हैं कि बगला क्षेत्र के दक्षिण दिशा में ‘तीन सिर’ (त्रिशिरानामक) वाली देवी का वास है। सबसे रोमांचक बात यह है कि उनके पास एक ‘महासिंह’ नित्य बार-बार गरजता हुआ रहता है, जिसकी दहाड़ क्षेत्र की दिव्यता को दर्शाती है।

​अदृश्य काली नारियां और दिव्य संगीत: यहाँ माँ बगला के सानिध्य में काले शरीर और काले वस्त्र पहने, अत्यंत भयानक स्वरूप वाली कई नारियां अदृश्य होकर यहाँ विचरण करती रहती हैं। यहाँ भाँति-भाँति के दिव्य वाद्य यंत्र बजते हैं और ‘हुंकार’ के शब्द गूँजते रहते हैं।

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​पापियों के लिए प्रवेश निषेध

​महादेव की स्पष्ट चेतावनी है: “पापी मनुष्य यहाँ ठहर नहीं सकता है।” लेकिन, जो व्यक्ति धैर्यवान है, संयुक्त जप करने वाला है, शिवपरायण है तथा परनिन्दा और परस्त्री से विमुख है, उसे यहाँ रहते हुए लेश मात्र भी भय नहीं होता। वह निर्भयता से शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त कर लेता है।

​कुबेर की दबा हुआ खजाना और पवित्र नदियां

​इस दिव्य क्षेत्र के रहस्यों की सूची यहीं समाप्त नहीं होती। इस क्षेत्र में स्नान की भी बहुत बड़ी महिमा है। साथ ही, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ की पर्वतमालाओं में ‘भगवान कुबेर’ की अपार संपत्ति दबी हुई है।

​पुराण में यह भी वर्णन है कि क्षेत्र के वाम भाग में ‘तामवणी’ नाम की सर्वश्रेष्ठ नदी बहती है, जो समस्त कामनाओं का फल देने वाली है।

​निष्कर्ष: सौ वर्षों में भी वर्णन असंभव

​स्कंद पुराण में स्वयं भगवान शिव के मुख से यह वर्णित है कि “बगला क्षेत्र के तीर्थों की इतनी बड़ी महिमा है कि विस्तार से तो सौ वर्षों में भी इसका वर्णन नहीं किया जा सकता।”

​माँ बगलामुखी का यह पौराणिक ‘बगला क्षेत्र’ वर्तमान समय में उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिले के घनसाली-घुत्तू क्षेत्र में स्थित है। इस पावन जयंती पर, आइए हम उस दिव्य ब्रह्मास्त्र विद्या स्वरूपा माँ बगलामुखी को नमन करें और उनकी रहस्यमयी महिमा का गुणगान करें।

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