हैट्रिक का जश्न आस्था के संग: लालकुआँ व्यापार मण्डल अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट ने माँ अवंतिका के चरणों में नवाया शीश, लिया लोक कल्याण का संकल्प

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हैट्रिक का जश्न आस्था के संग: लालकुआँ व्यापार मण्डल अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट ने माँ अवंतिका के चरणों में नवाया शीश, लिया लोक कल्याण का संकल्प
लालकुआँ:
लालकुआँ व्यापार मण्डल के चुनावों में एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए दीवान सिंह बिष्ट ने लगातार तीसरी बार अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। व्यापारियों के इस अपार समर्थन और शानदार विजय के बाद, नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने जीत के जश्न से पहले अध्यात्म और आस्था का मार्ग चुना। अपनी इस सफलता को नगर की जनता और ईश्वर को समर्पित करते हुए उन्होंने सर्वप्रथम नगर की ईष्ट देवी माँ अवंतिका के दरबार में हाजिरी लगाई

माँ के चरणों में अर्पित किए श्रद्धा पुष्प
अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने और किसी भी भव्य जुलूस से पूर्व, दीवान सिंह बिष्ट सीधे माँ अवंतिका के प्राचीन व सिद्ध मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की तथा देवी के चरणों में आराधना के श्रद्धा पुष्प अर्पित किए। दर्शन के दौरान उनका आचरण बेहद सादगीपूर्ण और भक्तिभाव से ओतप्रोत नजर आया।

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लिया लोक कल्याण और व्यापारी हित का संकल्प

माँ अवंतिका के समक्ष नतमस्तक होकर दीवान सिंह बिष्ट ने केवल अपने लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण लालकुआँ नगर के ‘लोक कल्याण’ की कामना की। उन्होंने यह संकल्प लिया कि उनका यह तीसरा कार्यकाल पूरी तरह से जनसेवा, व्यापारियों के अधिकारों की रक्षा और नगर के विकास को समर्पित होगा।
इस अवसर पर भावुक होते हुए उन्होंने कहा, *”यह विजय मेरी नहीं, बल्कि लालकुआँ के हर उस व्यापारी साथी की है जिसने मुझ पर लगातार तीसरी बार अटूट विश्वास जताया है। माँ अवंतिका के आशीर्वाद से मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं हर कसौटी पर खरा उतरूं और हमारे बाजार क्षेत्र को एक नई और सुरक्षित पहचान दिला सकूं।”
सादगी की हो रही है भूरि-भूरि प्रशंसा
दीवान सिंह बिष्ट के इस कदम की पूरे लालकुआँ क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। अक्सर बड़ी जीत के बाद जहां आतिशबाजी और जुलूस का दौर शुरू होता है, वहीं अपने नेता को सर्वप्रथम ईष्ट देवी के दर पर शीश झुकाते देख व्यापारियों का उनके प्रति सम्मान और भी बढ़ गया है। मंदिर प्रांगण में उनके साथ आचार्य चन्द्र शेखर जोशी मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण खाती मौजूद रहे जहाँ पूरा माहौल ‘माँ अवंतिका के जयकारों’ से गूंज उठा।
दीवान सिंह बिष्ट की यह शुरुआत एक स्पष्ट संदेश देती है कि पद और सफलता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, उसकी सार्थकता ईश्वर के आशीर्वाद और जनता की निस्वार्थ सेवा में ही निहित है।