“वात्सल्य की छाँव में खिलखिलाता बचपन”

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बचपन की मासूमियत और एक लाडली की जादुई मुस्कान
​दुनिया के सारे रंग, सारी खुशियां और सारा सुकून अगर कहीं एक साथ तलाशना हो, तो वह एक बच्चे के मासूम चेहरे और उसकी निश्छल मुस्कान में ही मिल सकता है। तस्वीर में दिख रही इस प्यारी सी बिटिया को देखकर यह बात शत-प्रतिशत सच साबित होती है।
​इसके बिखरे हुए घुंघराले बाल और उनमें बंधे हरे रंग के रिबन इसकी प्यारी सी शरारतों की चुगली करते हैं। पीली टी-शर्ट और नीले रंग की डेनिम डंगरी पहने, अपने नन्हे हाथों में पानी की छोटी सी बोतल थामे इस गुड़िया की बड़ी-बड़ी और गहरी आँखों में एक पूरी दुनिया बसती है। एक ऐसी दुनिया जिसमें कोई छल-कपट नहीं, बल्कि सिर्फ प्यार, असीम जिज्ञासा और एक निर्मल आनंद है। भले ही तस्वीर में वह जोर से खिलखिला नहीं रही है, लेकिन उसके चेहरे का यह ठहराव और भोलापन अंदर की उस खुशी का अक्स है, जो किसी के भी दिन को रोशन कर दे।
​बचपन की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि वह अपने आस-पास के माहौल को भी अपने रंग में रंग देता है।  इस बच्ची की चमत्कारी उपस्थिति ने उस पूरी जगह में एक नई जान फूंक दी है।
​उसे प्यार से गोद में लिए हुए शख्स के चेहरे पर जो सुकून और वात्सल्य है, वह शब्दों से परे है। वह उसे जिस स्नेह से निहार रहे हैं, वह बताता है कि उनके लिए दुनिया की सबसे कीमती दौलत उनकी बाँहों में है। दुनिया भर की भागदौड़ और चिंताएं इस लाडली के माथे को चूमते ही या इसे सीने से लगाते ही जैसे छूमंतर हो जाती होंगी।
​बेटियां तो वैसे भी घर के आंगन को महकाने वाली वह पारिजात होती हैं, जिनकी खिलखिलाहट से बेजान दीवारों में भी प्राण आ जाते हैं। इस बिटिया के चेहरे का यह निश्छल भाव और होंठों पर छुपी हुई वह अनकही मुस्कान इस बात का प्रतीक है कि जीवन की सार्थकता इसी वात्सल्य और बचपन की प्रसन्नता में है।
​ईश्वर करे, इस लाडली की आँखों की यह मासूम चमक और इसके जीवन की यह खिलखिलाहट आने वाले हर कल में यूँ ही बरकरार रहे। यह तस्वीर सिर्फ एक पल को कैमरे में कैद नहीं करती, बल्कि यह जीवन के सबसे खूबसूरत और पवित्र एहसास ‘वात्सल्य’ का एक जीता-जागता दस्तावेज़ है।