पाकिस्तान के साथ दो युद्ध लड़ने वाले कर्नल हरीश रौतेला अलविदा!

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जगमोहन रौतेला 
हल्द्वानी – जज फार्म निवासी और मूल रूप से बागेश्वर जिले के कमस्यार घाटी के नरगोली गांव के रहने वाले कर्नल हरीश रौतेला की अस्थियों का विसर्जन रानीबाग के चित्रशीला घाट में शनिवार 20 दिसम्बर 2025 को किया गया। कर्नल रौतेला ने पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 में हुई लड़ाईयों में सक्रियता से हिस्सा लिया था। 1971 के भारत-पाक युद्ध में वीरता के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सेना मेडल से सम्मानित भी किया गया था। उनके सम्मान में पाकिस्तान सीमा पर स्थित गुरकी गाँव का नाम “हरीश नगर” रखा गया।

उन्होंने अपनी देशभक्ति और वीरता से एक इतिहास बनाया है। वे भारतीय सैन्य इतिहास के पन्नों में हमेशा अमर रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि कर्नल हरीश रौतेला पिछले कुछ समय से अपने बड़े पुत्र सुखेंदु रौतेला के साथ बेंगलुरु में रह रहे थे। उम्र संबंधी परेशानियों के चलते 88 वर्षीय कर्नल रौतेला को बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां उपचार के दौरान गत 16 दिसंबर को उनका निधन हो गया और 18 दिसंबर को पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार बेंगलुरु में ही किया गया। जहां आठ गढ़वाल राइफल और सीओएजी द्वारा उन्हें सैन्य सलामी देकर अंतिम विदाई दी गई।

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उनकी अंतिम इच्छा अनुसार उनकी अस्थियों का विसर्जन शनिवार को चित्रशीला घाट (रानीबाग -हल्द्वानी) में उनके बड़े पुत्र सुखेंदु रौतेला और छोटे पुत्र राघवेंद्र रौतेला ने परंपरा अनुसार किया। अस्थि विसर्जन का कार्य पुरोहित शिव दत्त जोशी ने संपन्न करवाया।

अस्थि विसर्जन के समय चित्रशिला घाट में उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत, प्रोफेसर आनंद सिंह रौतेला, दान सिंह रौतेला, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कैलाश रौतेला, वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला, द्वाराहाट इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रधानाचार्य रहे डॉ. रमेश चंद्र सिंह मेहता, शोभा रावत, शंकर रौतेला, सुरेंद्र रौतेला, अशोक रौतेला, सुशील रौतेला, निक्कू रौतेला और चिरंजीवी रौतेला शामिल थे।
कर्नल हरीश रौतेला का जन्म 29 जनवरी 1937 को बागेश्वर जिले के नरगोली गांव में हुआ। उनकी मां का नाम विशनुली रौतेला और पिता का नाम हयात सिंह रौतेला था। हयात सिंह ब्रिटिश आर्मी में सुबेदार थे। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना की ओर से कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ी और अपनी वीरता का परिचय दिया। जिसके बाद ब्रिटिश आर्मी ने उन्हें “जंगी” की उपाधि से नवाजा था। कर्नल हरीश सिंह रौतेला योग्य पिता के योग्य लड़के थे। उनकी शिक्षा किंग जार्ज रायल मिलिट्री स्कूल जालंधर में हुई थी।
कर्नल रौतेला चार भाइयों दान सिंह, मनोहर सिंह और आनंद सिंह में सबसे बड़े थे। उन्होंने 1962 में सेना में कमीशन प्राप्त किया और आठ गढ़वाल राइफल में उनकी नियुक्ति हुई। 1965 में उन्हें मेजर के रूप में पदोन्नति मिली। वे काण्डा -कमस्यार में आजादी के बाद के प्रथम सैन्य अधिकारी थे।
वे 1988 में कर्नल के पद से सेना से सेवानिवृत हुए। सेना में उत्कृष्ट कार्यों के लिए फील्ड मार्शल सैम मानैकशा, सेनाध्यक्ष जर्नल थिमैया और सेनाध्यक्ष जरनल वैद्य ने उन्हें सम्मानित किया था। देशभक्ति और अदम्य साहस के प्रतीक कर्नल हरीश रौतेला को भावपूर्ण श्रद्धांजलि! ***

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