लालकुआँ स्थित प्राचीन मंदिर में दर्शन कर यात्रियों ने की सफल एवं निर्विघ्न यात्रा की कामना
लालकुआँ।
महाराष्ट्र से पवित्र आदि कैलाश यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के एक दल ने लालकुआँ पहुंचकर माँ अवंतिका मंदिर में विधिवत दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। यात्रियों ने हिमालय की कठिन एवं आध्यात्मिक यात्रा की सफलता तथा निर्विघ्न संपन्नता के लिए माँ अवंतिका का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आध्यात्मिक वातावरण और श्रद्धा से ओतप्रोत इस अवसर पर यात्रियों ने मंदिर परिसर में प्रवास कर रहे दिगम्बर अखाड़ा अयोध्या के प्रसिद्ध बैरागी संत देवदास त्यागी महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद भी लिया। संत देवदास त्यागी ने यात्रियों को धर्म, सेवा और साधना का संदेश देते हुए यात्रा के सफल एवं मंगलमय होने की कामना की।
मंदिर पहुंचने पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष लक्ष्मण खाती तथा मंदिर के आचार्य पंडित चन्द्रशेखर जोशी ने श्रद्धालुओं का पारंपरिक रूप से स्वागत किया। उन्होंने यात्रियों को माँ अवंतिका मंदिर की आध्यात्मिक महिमा और क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं की जानकारी भी दी।
18 सदस्यीय श्रद्धालुओं के दल ने मंदिर परिसर के शांत, दिव्य और ऊर्जावान वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ पहुंचकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हुई। यात्रियों ने कहा कि हिमालय की कठिन यात्रा से पूर्व इस प्रकार का सकारात्मक और शांतिमय वातावरण उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करता है।
यात्रा दल में विद्या जादव, निमिषा राउत, कैलाश जादव, शैलेश राउत सहित अनेक श्रद्धालु शामिल रहे। सभी यात्रियों ने माँ अवंतिका से प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि तथा मानव कल्याण की कामना की।
उल्लेखनीय है कि आदि कैलाश यात्रा को हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और तपस्वी यात्रा माना जाता है। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित आदि कैलाश भगवान शिव से जुड़ा प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है, जहाँ हर वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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