रिपोर्ट: रमाकांत पंत
बिंदुखत्ता के ढलान चक्की स्थित प्राचीन भूमिया देवता मंदिर इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के अद्भुत रंग में रंगा हुआ है। मंदिर प्रांगण में चल रही श्री शिव महापुराण कथा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। हर ओर “हर-हर महादेव” के जयघोष, शंख-घंटियों की मधुर ध्वनि और दीपों की आलोकित आभा से वातावरण दिव्य हो उठा है। श्रद्धालुजन भाव-विभोर होकर कथा का रसपान कर रहे हैं, मानो शिवकृपा स्वयं इस पावन स्थल पर अवतरित हो गई हो।
भूमिया देवता का यह मंदिर बिंदुखत्ता की धरा पर स्थित सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। प्राचीन काल से ही यह स्थल आस्था, विश्वास और लोक-परंपराओं का अलौकिक संगम रहा है। दूर-दूर से आने वाले भक्तजन यहां पूजा-अर्चना कर मनोकामनाएं करते हैं और भूमिया देवता को क्षेत्र का रक्षक, न्यायप्रिय देव और लोक-पालक के रूप में स्मरण करते हैं। लोकमान्यता है कि भूमिया देवता अपने क्षेत्र, खेत-खलिहानों, परिवारों और गांव की सीमाओं की रक्षा करते हैं तथा सच्चे मन से मांगी गई मनौती को पूर्ण करते हैं।
मंदिर के आस्थावान भक्त विनोद बिष्ट बताते हैं कि यह मंदिर समूचे क्षेत्र की आस्था का प्रतीक है। यहां की परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं और भूमिया देवता के प्रति लोगों का अटूट विश्वास ही इस मंदिर की सबसे बड़ी शक्ति है। मान्यता है कि इस पावन स्थान पर श्रद्धा से की गई प्रार्थना निष्फल नहीं जाती भूमिया देवता अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं।
इन दिनों श्री शिव महापुराण कथा के आयोजन ने मंदिर की महिमा को और भी विराट रूप दे दिया है। कथा के माध्यम से भगवान शिव की लीलाओं, भक्ति, वैराग्य और कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन सुनकर श्रद्धालुओं के हृदय में शिवभक्ति का दीप प्रज्ज्वलित हो रहा है। कथा स्थल पर बैठी मातृशक्तियां, युवा, वृद्ध सभी एक स्वर में भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो भूमिया देवता और भगवान शिव की संयुक्त कृपा से यह स्थल श्रद्धा का महाकुंभ बन गया हो।
ढलान चक्की का भूमिया मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक विश्वास का केन्द्र भी है। श्री शिव महापुराण कथा के माध्यम से यहां न केवल आध्यात्मिक चेतना का विस्तार हो रहा है, बल्कि सामाजिक समरसता और लोकआस्था की जड़ें भी और अधिक सुदृढ़ हो रही हैं। यही कारण है कि बिंदुखत्ता की यह पावन धरा आज शिवभक्ति और भूमिया देवता की महिमा से आलोकित होकर दूर-दूर तक अपनी दिव्यता का संदेश दे रही है।
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