उत्तराखंड की राजनीति के एक युग का अंत: पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूड़ी का निधन

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उत्तराखंड की राजनीति के एक युग का अंत: पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूड़ी का निधन
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत के लिए आज का दिन बेहद दुखद समाचार लेकर आया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, प्रखर राजनेता और सैन्य अनुशासन की मिसाल रहे मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया है। वे पिछले काफी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।
उनके अवसान की खबर जैसे ही सामने आई, पूरे उत्तराखंड समेत राजनीतिक गलियारों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए पिछले कई दिनों से उनके देहरादून स्थित आवास पर उनके परिजनों, शुभचिंतकों और दिग्गज राजनेताओं का तांता लगा हुआ था। हर कोई उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहा था, लेकिन आज इस कद्दावर नेता ने अपनी अंतिम सांस ली।
अटल जी के आग्रह पर रखा था राजनीति में कदम
उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का नेतृत्व करने वाले बी.सी. खंडूड़ी की राजनीतिक यात्रा बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक रही है। सेना में अपने शौर्य और समर्पण की लंबी सेवा देने के बाद, जब वे सेवानिवृत्त हुए तो उनका राजनीति में आने का कोई विचार नहीं था। यह वर्ष 1990 का वह दौर था, जब वे दिल्ली स्थित अपना सरकारी आवास खाली करके अपने गृह नगर देहरादून में एक शांत जीवन बिताने की पूरी तैयारी कर चुके थे।
तभी देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके भीतर के एक कुशल नेतृत्वकर्ता को पहचाना। अटल जी ने ही उन्हें राष्ट्र सेवा के एक नए मार्ग यानी ‘राजनीति’ में कदम रखने के लिए प्रेरित किया।
फौजी’ अनुशासन और विकास की पहचान
अटल जी के मार्गदर्शन में राजनीति में आए खंडूड़ी जी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने न केवल केंद्रीय मंत्री के तौर पर अपनी अहम भूमिका निभाई, बल्कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी प्रदेश को नई दिशा दी। राजनीति में भी उन्होंने एक ‘फौजी’ का अनुशासन, बेदाग छवि और कर्तव्यनिष्ठा कायम रखी। राज्य में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों के लिए उनके द्वारा लिए गए कठोर और दूरदर्शी निर्णयों के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा।
उनके निधन से उत्तराखंड ने न केवल अपना एक सच्चा सपूत और कर्मठ नेता खो दिया है, बल्कि भारतीय राजनीति के एक बेहद अनुशासित और ईमानदार अध्याय का भी आज समापन हो गया है।