“सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता ही देवभूमि की मूल पहचान”: बेरीपड़ाव के होटल ‘उदय बाखई’ में भागवत कथा व महायज्ञ में पहुंचे सांसद अजय भट्ट कथा व्यास मनोज कृष्ण शास्त्री जी से लिया आशीर्वाद; यजमान गोपाल व नन्दन गोस्वामी ने किया भव्य स्वागत; प्रदेश की खुशहाली के लिए दी यज्ञ में आहुति
बेरीपड़ाव (नैनीताल): बेरीपड़ाव स्थित होटल ‘उदय बाखई’ के पावन प्रांगण में चल रही भव्य ‘श्रीमद् भागवत कथा एवं शत चण्डी महायज्ञ’ में विगत दिनों नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद अजय भट्ट सम्मिलित हुए। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर यजमान परिवार के गोपाल गोस्वामी, नन्दन गोस्वामी एवं आयोजन समिति से जुड़े गणमान्यजनों ने उनका पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ आत्मीय व भव्य स्वागत किया।
धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता करते हुए सांसद अजय भट्ट ने व्यासपीठ पर आसीन प्रख्यात कथा व्यास पूज्य मनोज कृष्ण शास्त्री जी के पावन चरणों में नमन कर उनका शुभाशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरांत उन्होंने यज्ञशाला में पहुंचकर शत चण्डी महायज्ञ में पूर्णाहूति समर्पित की और समूचे उत्तराखंड की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं आरोग्यता की मंगलकामना की। इस अवसर पर उन्होंने कथा श्रवण के उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से आत्मीय संवाद भी किया।

कार्यक्रम के दौरान सांसद अजय भट्ट से हुई विशेष बातचीत के मुख्य अंश:
सांसद अजय भट्ट से विशेष साक्षात्कार के प्रमुख अंश
प्रश्न : बेरीपड़ाव के होटल उदय बाखई परिसर में आयोजित इस पावन महायज्ञ और भागवत कथा में सम्मिलित होकर आपकी क्या आध्यात्मिक अनुभूति रही?
उत्तर: “होटल ‘उदय बाखई’ के इस प्रांगण में कदम रखते ही मन को अपूर्व शांति और दिव्यता की अनुभूति हुई। पूज्य व्यास मनोज कृष्ण शास्त्री जी के मुखारविंद से प्रवाहित भागवत अमृत और शत चण्डी महायज्ञ की पावन आहुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है। गोपाल गोस्वामी जी और नन्दन गोस्वामी जी के परिवार ने जिस निष्ठा और श्रद्धा के साथ इस धार्मिक आयोजन का बीड़ा उठाया है, वह अत्यंत सराहनीय है। ऐसे पवित्र वातावरण में संतों का सानिध्य और जनता का स्नेह मिलना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है।”
प्रश्न : देवभूमि की सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने में ऐसे धार्मिक अनुष्ठान कितने महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: “उत्तराखंड ऋषि-मुनियों और देवताओं की तपोभूमि है। हमारे सनातन धर्म का मूल सार केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। जब ‘उदय बाखई’ जैसे मंच पर गाँव-क्षेत्र के सैकड़ों लोग एक साथ बैठकर ईश्वर का ध्यान करते हैं, तो वर्ग, भेद और दूरियां स्वतः समाप्त हो जाती हैं। ऐसे अनुष्ठान हमारी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हैं और सामाजिक समरसता की नींव को मजबूत करते हैं।”
प्रश्न :. आज के दौर में युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और संस्कारों से जोड़े रखने के लिए आपका क्या संदेश है? उत्तर: “आज का युवा वर्ग तकनीकी और आधुनिक ज्ञान में निरंतर आगे बढ़ रहा है, जो गर्व की बात है। लेकिन प्रगति के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान और संस्कारों को संजोकर रखना भी उतना ही अनिवार्य है। पूज्य मनोज कृष्ण शास्त्री जी जैसे विद्वान संतों के प्रवचन युवाओं को जीवन जीने का सही मार्ग दिखाते हैं। मेरा युवा साथियों से यही आग्रह है कि वे अपनी सनातन जड़ों, माता-पिता के सम्मान और नैतिक मूल्यों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं; क्योंकि संस्कारवान युवा ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।”
प्रश्न : इस धार्मिक मंच पर जुटे विशाल जनसमूह के बीच क्षेत्र के विकास और जनसमस्याओं को लेकर आपकी क्या प्राथमिकताएं हैं?
उत्तर: “धार्मिक और सामाजिक मंचों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यहाँ जन-जन से सीधा और निष्कपट संवाद होता है। यजमान परिवार के गोपाल गोस्वामी जी, नन्दन गोस्वामी जी और स्थानीय नागरिकों ने क्षेत्र के जिन विषयों और प्राथमिकताओं पर चर्चा की है, उन पर कार्य करना मेरी नैतिक जिम्मेदारी है। बेरीपड़ाव और आसपास के तराई-भाबर अंचल में सड़क, पेयजल, विद्युत, चिकित्सा और शिक्षा जैसी आधारभूत सुविधाओं को निरंतर सुदृढ़ करना मेरी प्राथमिकता है। जनसेवा ही मेरी सबसे बड़ी साधना है।”
प्रश्न :शत चण्डी महायज्ञ की पावन आहुति के साथ आपने समूचे उत्तराखंड की सुख-समृद्धि के लिए क्या प्रार्थना व संकल्प लिया?
उत्तर: “माँ भगवती शत चण्डी की आराधना जगत के कल्याण और नकारात्मक शक्तियों के निवारण के लिए की जाती है। यज्ञशाला में आहुति समर्पित करते हुए मैंने यही प्रार्थना की है कि हमारी देवभूमि सदैव दैवीय आपदाओं से सुरक्षित रहे, हमारे अन्नदाता किसान, मातृशक्ति और युवा सदा समृद्ध रहें। हम सब मिलकर उत्तराखंड को देश का सबसे अग्रणी और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाएं।”
इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक, मातृशक्ति, युवा और श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने कथा वाचन और यज्ञ की पूर्णाहूति में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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