संस्कृति ही समाज की असली पहचान, इसे संजोए रखना हर नागरिक का दायित्व: प्रकाश गरजौला ‘उदय बाखई’ के कार्यक्रम में पहुंचे वरिष्ठ समाजसेवी; प्रतिष्ठान स्वामी नन्दन गिरी गोस्वामी से शिष्टाचार भेंट कर दी शुभकामनाएं

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‘उदय बाखई’ के कार्यक्रम में पहुंचे वरिष्ठ समाजसेवी; प्रतिष्ठान स्वामी नन्दन गिरी गोस्वामी से शिष्टाचार भेंट कर दी शुभकामनाएं

बेरीपड़ाव। बेरीपड़ाव स्थित प्रतिष्ठान ‘उदय बाखई’ के भव्य समारोह में पहुंचे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश गरजौला ने समाज को अपनी जड़ों और समृद्ध लोक-संस्कृति से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठान के स्वामी नन्दन गिरी गोस्वामी से आत्मीय मुलाकात करते हुए उन्होंने नए उपक्रम की सफलता और उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

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मुलाकात के दौरान बातचीत करते हुए श्री गरजौला ने कहा कि आज का युग भले ही आधुनिकता और तीव्र बदलावों का हो, लेकिन हमें अपनी पारंपरिक संस्कृति, लोक-मान्यताओं और सामाजिक मूल्यों को कदापि नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति में ही निहित होती है; जब व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कटता है, तो समाज की सामूहिक चेतना कमजोर पड़ने लगती है।

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कुमाऊं की लोक-आस्था के केंद्र व न्याय के देवता गोलज्यू के अनन्य भक्त श्री गरजौला ने इस अवसर पर प्रतिष्ठान की उन्नति और लोक-कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उद्यम के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान बनाए रखना ही सच्ची सफलता है।

गौरतलब है कि प्रकाश गरजौला क्षेत्र में मानवीय गुणों और निस्वार्थ सेवा की एक अद्भुत मिसाल हैं। क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में किसी भी समय सबसे आगे खड़े रहना और हर जरूरतमंद की मदद के लिए तत्पर रहना उनकी पहचान बन चुका है। उनके इसी सादगी भरे स्वभाव, निष्पक्ष भाव और अटूट सामाजिक जुड़ाव के चलते स्थानीय जनता में उनके प्रति गहरा आदर और अपनत्व है।

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इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग, स्थानीय व्यवसायी और ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने श्री गरजौला के प्रेरणादायी विचारों का स्वागत किया।

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