लालकुआं (नैनीताल)। श्री हनुमान मंदिर एवं श्री श्री 1008 बाबा केशव दास आश्रम, बाबाजी की कुटिया, ग्राम दुम्काबंगर उमापति, हल्दूचौड़, तहसील लालकुआं, जिला नैनीताल में चल रहे श्री हनुमान कथा ज्ञान यज्ञ सत्संग के नवें दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कथा व्यास आचार्य श्री सतीश लोहनी जी ने अपने प्रवचन में कहा कि
“जीवन में जो भी संकट आता है, उसे हनुमान जी नष्ट कर देते हैं संकट मिटे, सब पीड़ा नास। चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या सामाजिक, हर प्रकार की पीड़ा हनुमान कृपा से समाप्त हो जाती है। जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसे सभी मनोरथों की प्राप्ति होती है और जीवन की पूर्णता का अनुभव होता है।”
उन्होंने कहा कि यह कृपा रामभक्त हनुमान जी के प्रभाव से प्राप्त होती है। जैसे केवट को प्रभु श्रीराम की सेवा का सौभाग्य मिला, वैसे ही मंगल की प्राप्ति तभी होती है जब गुरु रूपी हनुमान जी की कृपा हो।
यजमान एवं प्रमुख अतिथि
श्री हनुमान कथा ज्ञान यज्ञ में यजमान के रूप में
श्रीमती एवं श्री देवी दत्त बमेटा जी तथा
श्रीमती एवं श्री दिनेश चंद्र मिश्रा जी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मंदिर पुजारी प्रकाश चंद्र जोशी, पंडित गणेश जोशी, आचार्य राजेश जोशी, ब्राह्मण कमल तिवारी, पंडित कैलाश जोशी सहित अनेक विद्वानजन उपस्थित रहे।
विशिष्ट उपस्थिति
हनुमान जी एवं बाबा केशव दास जी के अनन्य भक्त हरिदत्त कांडपाल जी,
विधायक मोहन सिंह बिष्ट जी (विधानसभा लालकुआं),
समाजसेवी उमेश अग्रवाल जी,
मंदिर समिति संरक्षक उमेश चंद्र कबड़वाल,
अध्यक्ष कैलाश चंद्र दुम्का,
उपाध्यक्ष दयाकिशन दुम्का,
सचिव बालाकृष्ण दुम्का,
कोषाध्यक्ष खीमानंद तिवारी,
उप सचिव भुबन कबड़वाल,
उप कोषाध्यक्ष मनोज कोठारी,
लेखा निरीक्षक दयाकिशन बमेटा,
उप लेखा निरीक्षक भुबन गरवाल,
कार्यकारिणी सदस्य कैलाश चंद्र बमेटा, लीलाधर कांडपाल, नवीन बमेटा,
ग्राम प्रधान मुकेश दुम्का,
पूर्व चेयरमैन गन्ना समिति हल्द्वानी राजीव कबड़वाल,
क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीमती कमला दुर्गापाल,
किसान सेवा समिति मोटाहलदू अध्यक्ष हेम दुर्गापाल,
पूर्व संचालक दुग्ध संघ लालकुआं लाल सिंह धपोला,
तथा अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
भक्ति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम
कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ जन, समाजसेवी, किसान प्रतिनिधि, मंदिर समिति पदाधिकारी एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक बना दिया।
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