लालकुआँ में शिव कथा का चौथा दिन: माता पार्वती की कठोर तपस्या और शिव-पार्वती विवाह प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु
लालकुआँ: अम्बेडकर नगर पार्क में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय भव्य शिव कथा के चौथे दिन भक्ति की अविरल गंगा बही। कथा श्रवण कर पुण्य अर्जित करने हेतु श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे पंडाल में “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे।
मानव जीवन अनमोल है, ईश्वर प्राप्ति ही एकमात्र उद्देश्य
इस पावन अवसर पर प्रसिद्ध कथा वाचिका सुश्री सोमा भारती जी ने अपनी मधुर और ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मानव शरीर चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद ईश्वर की विशेष कृपा से प्राप्त होता है। मानव जीवन अनमोल है और इसका एकमात्र उद्देश्य केवल सांसारिक भोग नहीं, बल्कि ईश्वर की प्राप्ति है। मृत्यु संसार का सबसे अटल सत्य है, जिससे कोई बच नहीं सकता। इसलिए अपने जीवन काल में ही सत्य को जान लेना चाहिए। सुश्री भारती ने बताया कि सत्संग और कथा श्रवण ही वह नौका है जिससे इस भवसागर को पार किया जा सकता है। हमारा ध्यान सदैव संसार की नश्वर वस्तुओं के बजाय ईश्वर के श्रीचरणों में रहना चाहिए।
अन्तकाल में नारायण का स्मरण ही मोक्ष का द्वार
कथा व्यास ने जीवन के अंतिम समय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अन्तकाल में जो परमपिता परमात्मा का स्मरण करता है, उसे सीधे ईश्वर की प्राप्ति होती है। जीवन भर मनुष्य जिस विषय का चिंतन करता है, मृत्यु के समय भी वही विचार उसके मन में आते हैं। इसलिए जीवन पर्यंत हरि-नाम का अभ्यास आवश्यक है, ताकि अंतिम श्वास के साथ नारायण का नाम स्वतः ही मुख से निकले और जीवात्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाए।
माता पार्वती की तपस्या और शिव-पार्वती विवाह का अद्भुत प्रसंग
चौथे दिन की कथा का मुख्य आकर्षण माता पार्वती की शिव को पाने के लिए की गई कठोर तपस्या और शिव-पार्वती विवाह का सुंदर वर्णन रहा। कथा वाचिका ने बताया कि माता पार्वती ने भगवान आशुतोष को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अन्न-जल त्यागकर घोर तपस्या की। उनकी ‘अपर्णा’ तपस्या (सूखे पत्ते तक खाना छोड़ देना) से तीनों लोक कंपायमान हो गए। इसके पश्चात शिव जी की बारात का अत्यंत मनोहारी और सजीव चित्रण प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगे।
“जनम जनम शिव पद अनुरागा…”
कथा में माता पार्वती के अटूट संकल्प “जनम जनम शिव पद अनुरागा, कोउ न मिटावन हारा” को विस्तार से समझाया गया। माता पार्वती का यह दृढ़ निश्चय था कि चाहे उन्हें करोड़ों जन्म क्यों न लेने पड़ें, वे वरण केवल भगवान शिव का ही करेंगी। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जब भक्त के हृदय में अपने इष्ट के प्रति ऐसा अटूट अनुराग और समर्पण जग जाता है, तो स्वयं भगवान को भी अपने भक्त के अधीन होना पड़ता है।
समर्पण भाव से सेवा में जुटे पवन चौहान, रामपाल शर्मा व राजकुमार सेतिया
इस भव्य और दिव्य आयोजन को सफल बनाने में पूर्व चेयरमैन पवन चौहान, रामपाल शर्मा और राजकुमार सेतिया जी की भूमिका अत्यंत सराहनीय है। ये सभी अपने सहयोगियों के साथ पूर्ण समर्पण और निस्वार्थ भाव से शिव कथा की व्यवस्था और सेवा में दिन-रात संलग्न हैं। उनका यह सुंदर विचार है कि— “धर्म के इस पावन कार्य में गिलहरी के समान योगदान देना भी हमारे जीवन की सार्थकता है। संत-महात्माओं और भक्तों की सेवा से बढ़कर दुनिया में कोई और पुण्य नहीं है।” उनका यह सेवाभाव पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना हुआ है।
कथा में इन गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
इस पुनीत अवसर पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दीपेन्द्र कोश्यारी, पूर्व विधायक नवीन दुम्का, वरिष्ठ समाजसेवी हेमवती नन्दन दुर्गापाल, कुन्दन सिंह मेहता, मोहन कुड़ाई, उमेश शर्मा, पूर्व चेयरमैन पवन चौहान, रामपाल शर्मा, रूप नारायण गौतम, नरेश चौधरी, विनोद श्रीवास्तव, राजकुमार सेतिया, सुभाष नागर, शुभम् जी, दीप लोहनी, महेश चौधरी, संजय अरोरा, आनन्द बल्लभ डौर्बी, विनय रजवार, कुलदीप शर्मा, वरुण पाठक, अरुण जोशी, चन्द्रिका बिष्ट, शोभा जोशी, मीना जोशी, मीना रावत, राज लक्ष्मी पण्डित, शुभम् शर्मा, देवेन्द्र शर्मा और प्रकाश जैन सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और धर्म लाभ उठाया।
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