संघर्ष की विरासत से जनसेवा तक: सैनिक से जननायक बने सुरेन्द्र सिंह लोटनी, 2027 की राजनीति में बन सकते हैं बड़ा चेहरा

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लालकुआँ।
नगर पंचायत लालकुआँ के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह लोटनी आज क्षेत्र की राजनीति में एक सशक्त और उभरते हुए जनप्रतिनिधि के रूप में पहचाने जा रहे हैं। मूल रूप से पिथौरागढ़ जनपद के मदकोट क्षेत्र के वल्थी गाँव के निवासी लोटनी का जीवन संघर्ष, अनुशासन, सेवा और संस्कारों की मजबूत नींव पर खड़ा है।
उनके पिताश्री स्वर्गीय श्री मोहन सिंह लोटनी पहाड़ के एक साधारण किसान होते हुए भी असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे। जटिल संघर्षों के बीच उन्होंने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। वे अखंड आदर्शों के प्रतीक, जरूरतमंदों के सहारा और दूर-दराज तक सम्मानित व्यक्तित्व थे। गाँव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी उनकी ख्याति एक सज्जन, परोपकारी और निष्ठावान व्यक्ति के रूप में थी। वर्ष 1994 में उनके निधन के बाद परिवार पर कठिन परिस्थितियाँ आईं, परंतु उनके जीवन-मूल्य आज भी परिवार की प्रेरणा बने हुए हैं।
पिताजी के स्वर्गवास के पश्चात माता श्रीमती देवकी देवी ने अद्भुत धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देते हुए पूरे परिवार को संभाला। चार संतानों दो पुत्र और दो पुत्रियों को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान की। एक पुत्री का विवाह स्वर्गीय पिताजी अपने जीवनकाल में कर गए थे, शेष पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन माता जी ने अपने दृढ़ संकल्प से किया। 65 वर्ष की आयु में भी वे परिवार की आधारशिला बनी हुई हैं।
सुरेन्द्र सिंह लोटनी ने स्नातक उपाधि प्राप्त करने के पश्चात 4 मार्च 2002 को भारतीय सेना में भर्ती होकर राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उन्होंने 17 वर्ष 28 दिन तक सेना में सेवा दी और 31 मार्च 2019 को सेवानिवृत्त हुए। सेना में प्राप्त अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान बनी।
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जनसेवा को अपने जीवन का ध्येय बना लिया। कोरोना काल जैसे कठिन समय में वे जरूरतमंदों के लिए राहत सामग्री, भोजन और सहयोग की व्यवस्था में अग्रणी रहे। दीन-दुखियों की सहायता, सामाजिक सहभागिता और जनसमस्याओं के समाधान के लिए तत्परता ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया। वर्षों से लालकुआँ को कर्मभूमि बनाकर सेवा करते हुए उन्हें जनता का अपार स्नेह मिला और वे नगर पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए। और कर्तव्य निष्ठा के साथ वे अपने दायित्वों का निवर्हन कर रहे है
उनकी कर्तव्यनिष्ठ छवि और साफ-सुथरी कार्यशैली के चलते आज क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में वे दावेदारी पेश करते हैं, तो लालकुआँ विधानसभा की राजनीति में समीकरण बदल सकते हैं। सैनिक पृष्ठभूमि का उन्हें विशेष लाभ मिल सकता है, क्योंकि लालकुआँ सैनिक बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। अनुशासन, सेवा और राष्ट्रधर्म की भावना उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को एक अलग पहचान देती है।
विभिन्न राजनीतिक दलों में संभावित उम्मीदवारों के बीच उनका नाम उभरता है तो यह कई दावेदारों के लिए चुनौती साबित हो सकता है। हालांकि समय की धारा किस दिशा में बहेगी, यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना निश्चित है कि यदि सुरेन्द्र सिंह लोटनी चुनावी समर में उतरते हैं तो 2027 का मुकाबला अत्यंत रोमांचक और दिलचस्प हो सकता है।