लालकुआँ। कुमाऊँ की आस्था, न्याय और लोकविश्वास के प्रतीक न्याय के देवता गोलू देवता का भव्य डोला इस वर्ष लालकुआँ में आयोजित होने वाले उत्तरायणी मेले का मुख्य आकर्षण रहेगा। 11 जनवरी से 15 जनवरी तक चलने वाले इस पांच दिवसीय मेले में गोलू देवता के डोले की भव्य शोभायात्रा को लेकर आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष श्री बी.सी. भट्ट से हुई विशेष बातचीत के प्रमुख अंश—
प्रश्न 1: उत्तरायणी मेले में गोलू देवता के डोले का क्या विशेष महत्व है?
बी.सी. भट्ट: गोलू देवता कुमाऊँ की जनआस्था के आराध्य देव हैं। उत्तरायणी मेले में उनका डोला निकलना हमारे लिए अत्यंत गौरव की बात है। यह डोला न्याय, सत्य और विश्वास का प्रतीक है, जिसे देखने और उसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
प्रश्न 2: डोले की भव्यता को लेकर क्या तैयारियां की गई हैं?
बी.सी. भट्ट: डोले को पारंपरिक वेशभूषा, छत्र-चंवर, ढोल-दमाऊं और लोकवाद्यों के साथ अत्यंत भव्य रूप दिया जाएगा। पूरी शोभायात्रा कुमाऊँनी संस्कृति और धार्मिक मर्यादा के अनुरूप होगी, ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति हो।
प्रश्न 3: यह डोला उत्तरायणी मेले को किस प्रकार विशिष्ट बनाता है?
बी.सी. भट्ट: उत्तरायणी मेला सांस्कृतिक उत्सव है, लेकिन गोलू देवता का डोला इसमें आस्था का प्राण भर देता है। इससे मेला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास का संगम बन जाता है।
प्रश्न 4: आदर्श रामलीला कमेटी की इस आयोजन में क्या भूमिका है?
बी.सी. भट्ट: आदर्श रामलीला कमेटी वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ी रही है। गोलू देवता के डोले की व्यवस्था, अनुशासन, परंपराओं का निर्वहन और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है, जिसे हम पूर्ण निष्ठा से निभा रहे हैं।
प्रश्न 5: मेला 11 से 15 जनवरी तक चलेगा, श्रद्धालुओं के लिए आपका क्या संदेश है?
बी.सी. भट्ट: मैं सभी श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से अपील करता हूँ कि वे 11 से 15 जनवरी तक आयोजित उत्तरायणी मेले में सपरिवार पधारें, गोलू देवता के डोले के दर्शन करें और इस पावन अवसर को अपनी सहभागिता से ऐतिहासिक बनाएं।
प्रश्न 6: गोलू देवता के प्रति नई पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगे?
बी.सी. भट्ट: गोलू देवता न्याय और सत्य के प्रतीक हैं। नई पीढ़ी को चाहिए कि वह अपनी संस्कृति, परंपराओं और देव आस्था से जुड़े, क्योंकि यही हमारी पहचान और मूल शक्ति है।
आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष बी.सी. भट्ट के अनुसार, 11 से 15 जनवरी तक चलने वाले उत्तरायणी मेले में गोलू देवता का डोला श्रद्धा, संस्कृति और न्याय की भावना का जीवंत प्रतीक बनकर मेले का सबसे बड़ा आकर्षण होगा।
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