सेंचुरी मिल के सीईओ अजय कुमार गुप्ता के कर-कमलों से हुआ द्वितीय दिवस उत्तरायणी मेला लालकुआँ का भव्य शुभारम्भ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही जोरदार धूम

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लालकुआँ।
लालकुआँ में आयोजित उत्तरायणी कौतिक मेले के द्वितीय दिवस का शुभारम्भ आज हर्षोल्लास और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक उमंग के साथ हुआ। सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल के सीईओ अजय कुमार गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में मिल के उपाध्यक्ष नरेश चन्द्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
उत्तरायणी मेला समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट तथा समिति के पदाधिकारियों ने दोनों अतिथियों का पारंपरिक ढंग से अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर भव्य स्वागत किया। पूरे परिसर में आतिथ्य, उत्सव और लोकआस्था का अनोखा समागम दृष्टिगोचर हुआ।

मुख्य अतिथि के प्रेरक उद्बोधन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि उत्तरायणी केवल मेला नहीं, बल्कि लोकपरंपराओं, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों, युवाओं और लघु व्यवसायों को नई ऊर्जा और दिशा मिलती है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त होता है।
उन्होंने समिति के अथक प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मेलों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं से युवाओं को जोड़ना है। उन्होंने कहा, “अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। हमें स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने समाज और संस्कृति को संरक्षित करना चाहिए।”

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विशिष्ट अतिथि नरेश चन्द्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि उत्तरायणी पर्व जन-जन को अपनी जड़ों से जोड़ने वाला पर्व है, और मेला समिति द्वारा किया गया यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर साबित होगा।

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सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

उद्घाटन के साथ ही मंच पर पारंपरिक और आधुनिक प्रस्तुतियों की ऐसी श्रृंखला आरम्भ हुई कि दर्शक देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण गुंजायमान करते रहे।
लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत झोड़ा, चांचरी और छोलिया नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यालयी बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियां, लोकगीत और देशभक्ति गीतों ने समारोह को और अधिक जीवंत बना दिया। ढोल-दमाऊ, रणसिंहा और कुमाऊँनी-गढ़वाली धुनों ने पूरे परिसर को उत्तराखंडी लोकसंस्कृति से सराबोर कर दिया।

झूले, स्टॉल और स्थानीय उत्पाद बने आकर्षण का केन्द्र

मेले में लगे झूले, मनोरंजन खेल, खिलौनों की दुकानें, स्थानीय हस्तशिल्प, ऊनी परिधान, पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयों के स्टॉल पर भीड़ उमड़ती रही। महिलाओं और युवतियों में विशेष उत्साह देखा गया, वहीं बच्चे झूलों पर झूमते नजर आए।

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व्यवस्थाओं के कड़े और सुव्यवस्थित इंतजाम

मेला समिति द्वारा सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और पार्किंग की समुचित व्यवस्था की गई है। अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट ने बताया कि आने वाले दिनों में प्रतिदिन भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, खेलकूद प्रतियोगिताएँ और लोककलाएं मेले का विशेष आकर्षण रहेंगी। ।
द्वितीय दिवस का उत्तरायणी कौतिक मेला लालकुआँ में उत्सव, उमंग और लोकगौरव का भव्य प्रतीक बनकर सामने आया है। आने वाले दिनों में होने वाले बड़े कार्यक्रमों को लेकर नगरवासियों में जबरदस्त उत्सुकता और रोमांच देखा जा रहा है।

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