बिन्दुखत्ता।
बिन्दुखत्ता में आयोजित होने वाला पारम्परिक पाँच दिवसीय उत्तरायणी कौतिक मेला इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। मेले को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही हैं। यह मेला 12 जनवरी से 16 जनवरी तक आयोजित होगा।
इस संबंध में उत्तरायणी कौतिक मेला समिति, बिन्दुखत्ता के अध्यक्ष दीप जोशी से विशेष बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि उत्तरायणी मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोक परम्पराओं, संस्कृति और सामाजिक एकता का उत्सव है।
प्रश्न : मेला समिति इस वर्ष किस तरह की तैयारियाँ कर रही है?
दीप जोशी :“इस बार मेले को और अधिक सुव्यवस्थित व आकर्षक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंच, सजावट, सुरक्षा, स्वच्छता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बेहतर व्यवस्था की जा रही है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।”
प्रश्न : मेले की प्रमुख विशेषताएँ क्या होंगी?
दीप जोशी :“उत्तरायणी मेले में लोक संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिलेगी। कुमाऊँनी लोकगीत, लोकनृत्य, पारम्परिक वाद्ययंत्र, सांस्कृतिक झांकियाँ और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाँ मेले का मुख्य आकर्षण रहेंगी।”
प्रश्न : युवाओं और नई पीढ़ी के लिए मेले का क्या संदेश है?
दीप जोशी :“हम चाहते हैं कि युवा अपनी जड़ों से जुड़ें। उत्तरायणी मेला उन्हें अपनी संस्कृति, भाषा और परम्पराओं को समझने और अपनाने का अवसर देता है।”
अंत में उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे परिवार सहित मेले में पहुँचे और इस लोक सांस्कृतिक उत्सव को सफल बनाने में सहयोग करें।
बिन्दुखत्ता का उत्तरायणी कौतिक मेला एक बार फिर लोक आस्था, संस्कृति और उल्लास का संगम बनने जा रहा
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