​हनुमानगढ़ी: अयोध्या का वह ‘कोट’ जहाँ बजरंगबली की आज्ञा के बिना राम दरबार में भी प्रवेश वर्जित है

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हनुमानगढ़ी: अयोध्या का वह ‘कोट’ जहाँ बजरंगबली की आज्ञा के बिना राम दरबार में भी प्रवेश वर्जित है
​अयोध्या | प्रभु श्री राम की पावन नगरी अयोध्या न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्यों और मर्यादाओं की वह धरती है जहाँ आज भी ‘भक्त’ की पूजा ‘भगवान’ से पहले की जाती है। इसी परंपरा का जीवंत प्रतीक है हनुमानगढ़ी, जिसे अयोध्या का ‘कोतवाली’ और हनुमान जी को यहाँ का ‘कोतवाल’ कहा जाता है।

​भक्ति और सुरक्षा का अनूठा संगम

मान्यता है कि 14 वर्ष के वनवास और लंका विजय के पश्चात जब प्रभु राम अयोध्या लौटे, तो उन्होंने अपने परम भक्त हनुमान जी को रहने के लिए यही स्थान दिया था। तब से बजरंगबली यहीं विराजमान होकर पूरी अयोध्या और रामकोट की रक्षा करते हैं। यही कारण है कि सदियों से यह विधान चला आ रहा है कि रामलला के दर्शन से पहले भक्त हनुमानगढ़ी में शीश नवाते हैं।

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इस अलौकिक धाम की मुख्य विशेषताएं:

​76​हनुमानगढ़ी: अयोध्या का वह ‘कोट’ जहाँ बजरंगबली की आज्ञा के बिना राम दरबार में भी प्रवेश वर्जित है सीढ़ियों का सफर: मंदिर की भव्यता तक पहुँचने के लिए भक्तों को 76 मनभावन सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जो उन्हें दिव्यता का अनुभव कराती हैं।

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अद्भूत प्रतिमा:

यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा मात्र छह इंच की है, जो हमेशा पुष्पों और शृंगार से सुशोभित रहती है।
​राजा विक्रमादित्य का योगदान: कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण महान धर्मात्मा राजा विक्रमादित्य द्वारा करवाया गया था।
​संकटमोचन स्वरूप: यहाँ की मान्यता है कि इस दरबार में मांगी गई कोई भी मनौती कभी निष्फल नहीं जाती और मनुष्य की समस्त व्याधियां शांत हो जाती हैं।
​”हनुमानगढ़ी केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि वह रक्षा कवच है जिसके भीतर अयोध्या सुरक्षित है। यहाँ की निराली शांति सांसारिक मायाजाल में भटके मानव को नई राह दिखाती है।”

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पर्यटन और पहुँच

सरयू तट के निकट स्थित यह मंदिर अयोध्या रेलवे स्टेशन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है। आज भी यहाँ शिव अवतार हनुमान जी के साक्षात वास की अनुभूति भक्तों को प्रफुल्लित कर देती है। यदि आप अयोध्या की विराट भव्यता को महसूस करना चाहते हैं, तो हनुमानगढ़ी की चौखट पर हाजिरी लगाना अनिवार्य है।

रमाकान्त पन्त

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