अल्मोड़ा में मानवता के प्रहरी चिकित्सकों का ऐतिहासिक सम्मान, भावनाओं से सराबोर हुआ जिला चिकित्सालय परिसर

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अल्मोड़ा। पंडित हर गोविंद पंत जिला चिकित्सालय में विषम परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और निरंतर बढ़ते दायित्वों के बीच मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म मानकर कार्य कर रहे देवतुल्य चिकित्सकों का वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के नेतृत्व में एक गरिमामय, भावविह्वल और ऐतिहासिक समारोह में सम्मान किया गया। यह आयोजन केवल औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि उन जीवनरक्षकों के प्रति समाज की सामूहिक कृतज्ञता का सशक्त और भावपूर्ण प्रकटीकरण था, जो प्रतिदिन असंख्य परिवारों के जीवन में आशा और विश्वास की नई किरण जगाते हैं।
समारोह में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीश चंद्र गड़कोटी, वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अमित सुकोटी एवं डॉ. धीरज राज, नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. मोनिका सम्मल, अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश तथा रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मोहित टम्टा को शॉल ओढ़ाकर और पुष्पमालाएं अर्पित कर सम्मानित किया गया। उपस्थित नागरिकों ने खड़े होकर तालियों की गूंज के साथ उनका अभिनंदन किया। पूरा परिसर गर्व, श्रद्धा और भावनात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
कार्यक्रम में रामशिला वार्ड के पार्षद नवीन चंद्र आर्य (बबलू भाई), टेलर एसोसिएशन अल्मोड़ा के अध्यक्ष एस.आर. बेग, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य आनंद सिंह बिष्ट सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि संसाधनों की सीमाओं के बावजूद जिस निष्ठा, दक्षता और संवेदनशीलता के साथ चिकित्सालय की टीम कार्य कर रही है, वह वास्तव में अनुकरणीय है और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
वक्ताओं ने बताया कि जिला चिकित्सालय में आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही हैं, जिससे मरीजों को कम पीड़ा, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। नाक-कान-गला के जटिल ऑपरेशन उच्च दक्षता के साथ संपन्न हो रहे हैं, वहीं अस्थि रोगों की आधुनिक शल्य चिकित्सा तथा रेडियोलॉजी विभाग की त्वरित और सटीक जांच सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा उपलब्ध करा रही हैं। यह उपलब्धि अल्मोड़ा को आत्मनिर्भर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में अग्रसर करने वाला महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।
अपने भावपूर्ण संबोधन में संजय पाण्डे ने कहा,
“जब कोई व्यक्ति जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा होता है, तब डॉक्टर ही उसके लिए ईश्वर का साक्षात स्वरूप बनकर सामने आते हैं। उनका समर्पण केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि मानवता की तपस्या है। समाज उनके इस ऋण को कभी चुका नहीं सकता, पर सम्मान के माध्यम से कृतज्ञता अवश्य व्यक्त कर सकता है।”
समारोह के अंत में उपस्थित नागरिकों ने सम्मानित चिकित्सकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल और सफल भविष्य की कामना की। यह आयोजन न केवल चिकित्सा सेवा के प्रति सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि समाज और चिकित्सकों के बीच विश्वास, संवेदना और सहयोग के सशक्त सेतु के रूप में भी स्थापित हुआ।

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