लालकुआँ में विराट हिन्दू सम्मेलन: सैकड़ों लोगों की उपस्थिति, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का संदेश गूंजा

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लालकुआँ। नगर में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं, युवाओं एवं मातृशक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन का वातावरण राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता के संकल्प से ओतप्रोत दिखाई दिया।
कार्यक्रम में जिला प्रचारक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के श्री जितेन्द्र ने मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत वैदिक मंत्र “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” से करते हुए कहा कि हिन्दू संस्कृति का मूल भाव समस्त मानवता के कल्याण का है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के उत्थान और राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक चिंतन को आगे बढ़ाना है।
जिला प्रचारक ने कहा कि हिन्दू संस्कृति विश्व को सहिष्णुता, समरसता और वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश देती है। हमें अपनी परंपराओं, संस्कारों और आध्यात्मिक धरोहर का प्रचार-प्रसार करते हुए नई पीढ़ी को इसके महत्व से अवगत कराना होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का आधार बनाएं और समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।
संघ के विषय में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक सांस्कृतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र को सशक्त बनाना है। संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर कार्य करता है। शाखाओं के माध्यम से अनुशासन, सेवा, समर्पण और संगठन की भावना का विकास किया जाता है।
उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल नारों तक सीमित न रहे, बल्कि वह हमारे आचरण और व्यवहार में भी झलके। समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने, समरसता स्थापित करने और सेवा कार्यों को बढ़ावा देने के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं।
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने हिन्दू समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ।
यह विराट हिन्दू सम्मेलन लालकुआँ में सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता का सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।