हौसलों से गढ़ी काया: परितोष सरकार की प्रेरक खेल यात्रा

ख़बर शेयर करें

 

लालकुआँ
संघर्ष, साधना और सफलता की त्रिवेणी से निकली एक ऐसी शख्सियत हैं परितोष सरकार, जिन्होंने न केवल शरीर सौष्ठव बल्कि अनेक खेलों में अपनी पहचान बनाई और युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे।

परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि

61 वर्षीय परितोष सरकार का जन्म पश्चिमी बंगाल में हुआ। वे चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता स्व. श्री परिमल सरकार और माता स्व. श्री रेवारानी सरकार के संस्कारों ने उन्हें अनुशासन, परिश्रम और सेवा भाव का पाठ पढ़ाया।

मिस्टर कुमाऊँ से राष्ट्रीय मंच तक

परितोष सरकार ने 1986 में पहली बार मिस्टर कुमाऊँ का खिताब जीता और यह गौरव लगातार पाँच वर्षों तक, 1990 तक अपने नाम रखा। 1987 में पीआरडी द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए चयन हुआ और लखनऊ के आलमबाग में हुए प्रदर्शन में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त कर तत्कालीन खेल मंत्री केदार सिंह फोनिया सहित अनेक मंत्रियों और अधिकारियों की उपस्थिति में सम्मान प्राप्त किया।
1988 में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा को और मजबूत प्रमाण दिया। 1993 में सेंचुरी मिल के तहत आगरा भेजे जाने पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपने ग्रुप में प्रथम स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।

यह भी पढ़ें 👉  11 हजार फीट की ऊँचाई पर दफन मोक्ष का भूगोल: जहाँ बर्फ के गर्भ से फूटती है अग्नि, पारे के बुदबुदाते हैं कुंड और लोहे को स्वर्ण बनाती है लाल धारा

अनुशासन और साधना की मिसाल

आज भी वे प्रतिदिन दो घंटे व्यायाम करते हैं। 1995 में अग्रसेन जिम, किच्छा में प्रशिक्षक रहते हुए उन्होंने सैकड़ों युवाओं को शारीरिक फिटनेस और खेल के प्रति प्रेरित किया। सेचुरी से रिटायमेन्ट के पश्चात उन्होंने वहा भी टेनर के रूप में अपनी सेवाएं देकर सैकड़ों लोगों को फिटनेस के रहस्य के सूत्र सिखाये

यह भी पढ़ें 👉  महाप्रलय के चक्रव्यूह में छिपा कलिकाल का परम गोपनीय मोक्ष-द्वार: जहां बर्फ के सीने में खौलता है ‘अग्निकुंड’ और साक्षात भगवती महालक्ष्मी बनाती हैं महाप्रसाद!

बहुमुखी खिलाड़ी

परितोष सरकार केवल बॉडी बिल्डिंग तक सीमित नहीं रहे। उन्हें खो-खो, क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी सहित विभिन्न एथलेटिक खेलों में भी विशेष रुचि रही। 1982 में फैजाबाद में खो-खो प्रतियोगिता में भाग लेकर उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

प्रेरणा और संघर्ष की कहानी

कलकत्ता में एक अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग शो देखकर उनके भीतर इस क्षेत्र के प्रति रुचि जगी। बाद में हल्द्वानी में महेंद्र सिंह राणा के निर्देशन में उन्होंने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट मुकाम हासिल किया।

यह भी पढ़ें 👉  हिमशिखरों के अन्तराल में छिपा मोक्ष का अनादि रहस्य: श्री बद्रीनाथ

सेवा की ओर कदम

खेल प्रतिभा के आधार पर 1987 में सेंचुरी मिल में उन्हें स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी मिली। सेवानिवृत्त के पश्चात इन दिनों समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय हैं।

परितोष सरकार केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और सेवा के जीवंत उदाहरण हैं। उनकी जीवन यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखने का साहस रखता है।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad