बिंदुखत्ता इन्द्रानगर स्थित श्री महाबिंदेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के आठवें दिवस भक्तिभाव का अनुपम दृश्य देखने को मिला, जब दूर–दूर से उमड़ी विशाल श्रद्धालु भीड़ ने भाव-विभोर होकर कथा श्रवण किया। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और देवी नाम के जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा। कथा के उपरांत व्यास जी से हुई संक्षिप्त वार्ता में उन्होंने कहा कि माँ भगवती की कथा केवल श्रवण मात्र नहीं, बल्कि जीवन में धैर्य, सेवा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि देवी भागवत मानव जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर उसे संस्कारित और संयमित बनाती है, और जब समाज में भक्ति जागृत होती है तो सकारात्मक परिवर्तन स्वतः दिखाई देने लगते इस अवसर पर प्रसिद्ध कथा वाचक मनोज कृष्ण जोशी जी से हुई वार्ता के अंश
श्रीमद् देवी भागवत कथा :व्यासपीठ से विशेष साक्षात्कार
प्रश्न 1: गुरुदेव, अष्टम दिवस की कथा का मूल संदेश क्या रहा?
उत्तर (व्यास जी): आज की कथा में माँ भगवती की करुणा, शक्ति और संरक्षण स्वरूप का विशेष वर्णन हुआ। संदेश यही है कि जब मनुष्य अहंकार त्यागकर श्रद्धा और समर्पण भाव से माँ की शरण में आता है, तो उसके जीवन के संकट स्वयं दूर होने लगते हैं।
प्रश्न 2: श्रीमद् देवी भागवत का वर्तमान युग में क्या महत्व है?
उत्तर: यह केवल एक पुराण नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। आज जब समाज में तनाव, भय और असंतुलन बढ़ रहा है, तब देवी भागवत मन, बुद्धि और आत्मा को संतुलित करने का मार्ग दिखाती है।
प्रश्न 3: कथा श्रवण से साधक को क्या लाभ प्राप्त होता है?
उत्तर: श्रद्धा से कथा सुनने पर अंतःकरण शुद्ध होता है। नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भक्ति, शक्ति और मुक्ति तीनों का द्वार खोलती है।
प्रश्न 4: माँ भगवती के किस स्वरूप की साधना आज के समय में अधिक प्रासंगिक है?
उत्तर: माँ का प्रत्येक स्वरूप कल्याणकारी है—दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती। आज के युग में दुर्गा स्वरूप विशेष आवश्यक है, जो हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति देता है।
प्रश्न 5: क्या केवल अनुष्ठान पर्याप्त हैं या आचरण भी आवश्यक है?
उत्तर: केवल पूजा-पाठ पर्याप्त नहीं। जब तक जीवन में सत्य, संयम और करुणा का पालन नहीं होगा, तब तक साधना पूर्ण नहीं मानी जाती।
प्रश्न 6: नारी शक्ति के संदर्भ में देवी भागवत का क्या संदेश है?
उत्तर: देवी भागवत स्पष्ट करती है कि नारी ही सृजन और शक्ति का मूल है। समाज में नारी का सम्मान ही सच्ची देवी उपासना है।
प्रश्न 7: युवाओं के लिए आपका विशेष संदेश क्या है?
उत्तर: युवा शक्ति राष्ट्र की धरोहर है। उन्हें अपने जीवन में संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिकता को अपनाना चाहिए। आधुनिकता के साथ अध्यात्म का संतुलन आवश्यक है।
प्रश्न 8: अष्टम दिवस पर श्रद्धालुओं के लिए आपका आशीर्वचन?
उत्तर: माँ भगवती सभी पर कृपा दृष्टि बनाए रखें। सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। जो भी श्रद्धा से कथा श्रवण कर रहा है, उसके जीवन से संकट दूर हों और परिवार में मंगलमय वातावरण बना रहे।
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