माँ अवंतिका के सानिध्य में विराजमान कहार महादेव: वियावान वन में छिपा अलौकिक शिवधाम
लालकुआं/हल्दूचौड़।
कुमायूं के प्रवेश द्वार लालकुआं से पश्चिम दिशा में, लालकुआं और हल्दूचौड़ के मध्य घनघोर वनों की निस्तब्ध गोद में स्थित है एक प्राचीन और अलौकिक शिवधाम — कहार महादेव। विशेष बात यह है कि यह पावन स्थल लालकुआं स्थित माँ अवंतिका मंदिर धाम से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माँ अवंतिका के सानिध्य में विराजमान यह शिवस्थल श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
वनों के बीच विराजमान भगवान शिव की यह प्राचीन पिण्डी केवल एक देवस्थान नहीं, बल्कि लोकविश्वास, तप और दिव्य कृपा का जीवंत प्रतीक है। स्थानीय मान्यता है कि जो भी श्रद्धा-भाव से यहां आकर भगवान भोलेनाथ के चरणों में अपने श्रद्धा-पुष्प अर्पित करता है, उसके जीवन के रोग, शोक, दुख, दरिद्रता और समस्त विपदाओं का निवारण हो जाता है।
पहली फसल और पहली दुग्धधारा महादेव को
कहार महादेव को विशेष रूप से हल्दूचौड़ क्षेत्र के ग्रामीण अपने ईष्टदेव के रूप में पूजते आए हैं। भानदेव नवाड़, कृष्णा नवाड़ सहित आसपास के गांवों के श्रद्धालु समय-समय पर यहां आकर जल और दूध से अभिषेक करते हैं। वनों में निवास करने वाले दूधिये दशकों से इस स्थल पर अपनी पहली दुग्धधारा अर्पित करने की परंपरा निभाते रहे हैं।
जनश्रुति है कि खत्तों में निवास करने वाले लोग जब दुग्ध व्यापार हेतु जंगलों से आवागमन करते थे, तो इस स्थान पर विश्राम कर शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर अपने कार्य के लिए प्रस्थान करते थे। महादेव की कृपा से उनके घरों में सदैव समृद्धि बनी रहती थी।
विश्राम स्थली से सिद्धपीठ तक
वर्ष 1960 के दशक में सापकटानी सहित अन्य खत्तों के लोग इस मार्ग से गुजरते समय यहां विश्राम कर मानसिक शांति का अनुभव करते थे। कहारों की विश्राम स्थली होने के कारण यह स्थान “कहार महादेव” के नाम से विख्यात हुआ।
समय के साथ भक्तों ने यहां एक छोटा किन्तु श्रद्धामय मंदिर निर्मित कर दिया है। समय-समय पर रामायण पाठ, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजन यहां संपन्न होते रहते हैं। घने जंगलों के मध्य स्थित यह स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता से आगन्तुकों का मन मोह लेता है।
महाशिवरात्रि पर उमड़ती है आस्था
महाशिवरात्रि, सावन और अन्य पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु पहुंचते हैं। इस वर्ष भी महाशिवरात्रि का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। हर-हर महादेव के जयघोष से वनांचल गूंज उठा और वातावरण शिवमय हो गया।
महादेव के प्रति आस्था रखने वाले भक्त डी.के. जोशी का कहना है कि यह स्थल अब धीरे-धीरे विराट जनआस्था का केंद्र बनता जा रहा है।
तीर्थाटन की अपार संभावनाएं
हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड की अलौकिक छटा का प्रथम स्पर्श लालकुआं से आरंभ होता है। ऐसे में माँ अवंतिका धाम के समीप स्थित कहार महादेव का यह पौराणिक शिवस्थल तीर्थाटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है।
विडंबना यह है कि लालकुआं के अनेक निवासी भी इस दिव्य धाम से अभी तक अनभिज्ञ हैं। आवश्यकता है कि इस पावन स्थल को व्यापक पहचान मिले, जिससे माँ अवंतिका और कहार महादेव का यह संयुक्त आध्यात्मिक क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ बन सके।
माँ अवंतिका के आशीष और महादेव की कृपा से आलोकित यह वनधाम आज भी श्रद्धा, प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम है।
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