गौलापार हादसे के मातम के बीच कौन बना उस उजड़ते परिवार का फरिश्ता? जानिए इंसानियत की मिसाल पेश करती यह खास खबर

ख़बर शेयर करें

हल्दूचौड़। रिम्पी बिष्ट।
उत्तराखंड के गौलापार में हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी का दिल दहला दिया। एक ही पल में हंसता-खेलता परिवार बिखर गया और चारों तरफ अपनों को खोने की चीख-पुकार मच गई। जब पूरा क्षेत्र इस दुख में डूबा था और पीड़ित परिवार अपने भविष्य को लेकर बेबस नजर आ रहा था, तभी एक इंसान ऐसा आया जिसने केवल सांत्वना देने के बजाय आगे बढ़कर मदद की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी सराहना पूरे प्रदेश में हो रही है।
मुख्य बातें:
हादसे में टूटे परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए समाजसेवी शुभम अंडोला तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने अपने परिवार की ओर से 2 लाख रुपये की सीधी आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। शुभम की इस मानवीय पहल से प्रेरित होकर उनके मित्र अधिवक्ता प्रकाश सनवाल ने 50 हजार रुपये और अंकित अग्रवाल ने भी 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। इस प्रकार पीड़ित परिवार के लिए अब तक कुल 3 लाख रुपये की आर्थिक मदद का संकल्प लिया जा चुका है।
खोए हुए अपनों की भरपाई तो नहीं, पर संभलने की उम्मीद जरूर बन सकते हैं:
हादसे में जिन लोगों का निधन हुआ, वे परिवार के मुख्य आधार और भविष्य की उम्मीद थे। इस संकट की घड़ी में भावुक होकर शुभम अंडोला ने कहा कि भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद और मां लक्ष्मी की कृपा से उन्होंने अपने परिवार की तरफ से दो लाख रुपये देने का निर्णय लिया है। हादसे में जो लोग चले गए, उन्हें कोई वापस तो नहीं ला सकता, लेकिन यदि समाज इस कठिन समय में साथ खड़ा हो जाए, तो इस टूटे हुए परिवार को फिर से संभलने का सहारा जरूर मिल सकता है।
सच्ची श्रद्धांजलि संवेदना नहीं, सहयोग है:
शुभम अंडोला ने समाज के सक्षम लोगों से अपील करते हुए कहा कि हादसों के शुरुआती दिनों में तो हर कोई ढांढस बंधाने पहुंचता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, पीड़ित परिवार अकेला पड़ जाता है। ऐसे समय में केवल संवेदना व्यक्त करने से किसी का भविष्य सुरक्षित नहीं होता, असली सामाजिक जिम्मेदारी तो आर्थिक और व्यावहारिक मदद से पूरी होती है। यदि समाज एकजुट होकर छोटा-छोटा सहयोग भी करे, तो किसी का बिखरा हुआ जीवन फिर से संवर सकता है।
पहचान के मोहताज नहीं ‘हल्द्वानी रत्न’ शुभम अंडोला:
यह पहला मौका नहीं है जब शुभम अंडोला किसी पीड़ित के लिए ढाल बनकर खड़े हुए हों। वे वर्षों से गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा करते आ रहे हैं। उनकी इसी सेवा भावना और सामाजिक समर्पण के लिए उत्तराखंड की प्रतिष्ठित संस्था ‘पंखुड़ियाँ सांस्कृतिक, पर्यावरण एवं दिव्यांग कल्याण समिति’ द्वारा उन्हें “हल्द्वानी रत्न” सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।
समाज के लिए एक बड़ा संदेश:
गौलापार की इस दुखद घटना के बीच शुभम अंडोला और उनके मित्रों की यह पहल केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि यह सीख देती है कि असल मानवता क्या है। जब कोई परिवार पूरी तरह टूट चुका हो, तब समय पर बढ़ाया गया सहयोग का एक हाथ उसके जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज का हर सक्षम व्यक्ति अपनी क्षमता अनुसार आगे आए, क्योंकि किसी के कठिन समय में उसके साथ खड़े होना ही इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान है।