कुचौली/बागेश्वर। देवभूमि उत्तराखण्ड की पावन धरती पर नवरात्रि का पर्व सदैव विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इसी क्रम में महर्षि कुशण्डी ऋषि की तपोभूमि के रूप में विख्यात कुचौली गांव में नवरात्रियों के पावन अवसर पर भव्य महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इस महायज्ञ को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में विशेष उत्साह व्याप्त है।
मान्यता है कि इस महायज्ञ में क्षेत्र के प्राचीन देवता और नाग देवताओं में प्रमुख फेणीनाग जी साक्षी स्वरूप उपस्थित रहते हैं। कुमाऊँ अंचल की लोक परंपराओं में फेणीनाग देवता को क्षेत्रपाल और धर्म के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। लोकमान्यता के अनुसार वे इस क्षेत्र की रक्षा करते हैं तथा धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों में दिव्य साक्षी बनकर उपस्थित रहते हैं।
फेणीनाग देवता का उल्लेख कुमाऊँ की लोकगाथाओं और देव परंपराओं में विशेष रूप से मिलता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जहां भी वैदिक विधि से यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, वहां नाग देवताओं की दिव्य कृपा अवश्य रहती है। इसी कारण कुचौली में होने वाले महायज्ञ में फेणीनाग देवता की विशेष वंदना और पूजा भी की जाती है।
गौरतलब है कि कुचौली गांव महर्षि कुशण्डी ऋषि की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध है, जहां प्राचीन काल में ऋषि द्वारा लोककल्याण के लिए यज्ञ और हवन संपन्न किए जाते थे। हाल ही में यहां प्राचीन हवन कुण्ड की पुनः खोज होने के बाद इस स्थल की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता और भी बढ़ गई है।
नवरात्रि के इस पावन महायज्ञ में क्षेत्र के संत-महात्मा, विद्वान आचार्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। ग्रामीणों का मानना है कि फेणीनाग देवता की साक्षी में संपन्न होने वाला यह महायज्ञ क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि का संदेश लेकर आएगा तथा महर्षि कुशण्डी की तपोभूमि को पुनः आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
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