कमस्यार घाटी का आध्यात्मिक ध्रुवतारा बना कुचौली का गायत्री भवन: मनोज कृष्ण जोशी

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जगतगुरु रामभद्राचार्य जी के कृपापात्र शिष्य ने कहा—महर्षि कुशण्डी ऋषि की तपोभूमि आज भी जागृत आध्यात्मिक चेतना का केंद्र

बागेश्वर।
मनोज कृष्ण जोशी ने जनपद बागेश्वर की पावन कमस्यार घाटी स्थित कुचौली के गायत्री भवन को आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत एवं दिव्य केंद्र बताया है। उन्होंने कहा कि माँ भद्रकाली के पावन आँचल में स्थित यह क्षेत्र प्राचीन ऋषि परंपरा, तप और साधना की जीवंत धरोहर है।

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जगतगुरु श्री रामभद्राचार्य जी के कृपापात्र शिष्य एवं प्रसिद्ध कथावाचक मनोज कृष्ण जोशी ने कहा कि कुचौली गाँव का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विराट और अलौकिक है। उन्होंने कहा कि यह भूमि महर्षि कुशण्डी ऋषि की तपोस्थली रही है, जहाँ आज भी साधना, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव होता है।

उन्होंने गायत्री भवन की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थान केवल एक भवन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और सनातन संस्कृति के संरक्षण का केंद्र बन चुका है। यहाँ पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति अद्भुत शांति, दिव्यता और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव करता है।

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मनोज कृष्ण जोशी ने कहा कि कमस्यार घाटी की यह पुण्यभूमि भविष्य में आध्यात्मिक पर्यटन और धार्मिक चेतना के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सकती है। उन्होंने क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसे ऐसे तपस्थल केवल उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, जिनसे नई पीढ़ी को जोड़ना समय की आवश्यकता है।

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