“भक्ति और श्रद्धा के दीप से चमका लालकुआँ का पंडाल”

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लालकुआँ में श्री राम कथा के विराम दिवस पर डॉ० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ से भावपूर्ण संवाद
लालकुआँ: नौ दिवसीय श्री राम कथा का आज विराम दिवस आयोजित किया गया, जिसमें नगरवासियों और आसपास के ग्रामीणों ने भारी श्रद्धा के साथ भाग लिया। कथा वाचक डॉ० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ ने कथा के अन्तिम दिन अपने मनमोहक और जीवनोपयोगी वाचन से उपस्थित भक्तों के हृदय को गहरे प्रभावित किया।

कथा पंडाल में “जय श्री राम” के उद्घोष के बीच आयोजित विशेष संवाद में डॉ० मिश्रा ने कहा कि राम केवल कथा के पात्र नहीं, बल्कि जीवन जीने का आदर्श हैं। उन्होंने बताया कि उनके गुण सत्य, धैर्य, करुणा और सेवा आज के समाज में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कथा के प्रमुख संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा,
“रामराज्य केवल शासन की व्यवस्था नहीं, बल्कि न्याय, समानता और समाज कल्याण की स्थापना है। यदि हम राम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं, तो समाज से अधर्म और दुःख स्वतः समाप्त हो सकते हैं।”
डॉ० मिश्रा ने यह भी कहा कि कथा वाचन का सबसे सुखद पहलू यही है कि श्रोताओं के हृदय में कथा का भाव उतरता है। विराम दिवस पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी कथा के माध्यम से अपने जीवन में सुधार और आध्यात्मिक ऊर्जा अनुभव की।
युवाओं के लिए उन्होंने विशेष संदेश दिया कि वे राम के आदर्शों सत्य, सेवा और करुणा को अपनाकर अपने जीवन को बेहतर और समाज को सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं।
विराम दिवस पर आयोजित आरती और भजन संकीर्तन ने पंडाल को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। डॉ० मिश्रा ने अंत में सभी श्रद्धालुओं को धन्यवाद दिया और कहा कि यही कथा का वास्तविक फल है कि लोग जीवन में रामकथा के आदर्शों को अपनाएं।
कुल मिलाकर लालकुआँ में इस नौ दिवसीय कथा आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्गदर्शन हैं। डॉ० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ के वाचन और संवाद ने इस संदेश को नगरवासियों के हृदय में स्थायी रूप से अंकित कर दिया।