लालकुआँ /श्री राम कथा के विराम दिवस पर लालकुआँ में उमड़ा श्रद्धा का शैलाब

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लालकुआँ में राधे-राधे सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा का विराम दिवस अत्यंत भावुक, भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। जैसे-जैसे कथा का समापन समीप आया, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का सैलाब कथा पंडाल की ओर उमड़ पड़ा। वातावरण “जय श्री राम” के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा।

कथा वाचक व्यास डॉ० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ ने अन्तिम दिवस पर श्री राम कथा का ऐसा सार प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं के हृदय को छू लिया और आंखों को नम कर दिया।
अन्तिम दिवस की श्री राम कथा का भावपूर्ण सार

व्यास जी ने अन्तिम दिन राम राज्याभिषेक, रामराज्य की स्थापना, तथा मानव जीवन के लिए श्रीराम के आदर्शों को केन्द्र में रखते हुए कथा का सार प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि—
“श्रीराम केवल एक युग के नहीं, बल्कि प्रत्येक युग के लिए मर्यादा, करुणा और धर्म के प्रतीक हैं।”
कथा में बताया गया कि कैसे लंका विजय के पश्चात प्रभु श्रीराम ने अहंकार नहीं, बल्कि विनम्रता, क्षमा और सेवा भाव को अपनाया। रामराज्य की स्थापना केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं, बल्कि न्याय, समता, सत्य और लोककल्याण की स्थापना थी।
व्यास जी ने समझाया कि—
राम का जीवन कर्तव्यबोध का संदेश देता है सीता जी धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं
लक्ष्मण सेवा और समर्पण के आदर्श हैं
हनुमान जी निस्वार्थ भक्ति और शक्ति का स्वरूप हैं
उन्होंने कहा कि यदि आज का मानव अपने जीवन में राम के आदर्शों को उतार ले, तो समाज से दुःख, द्वेष और अधर्म स्वतः समाप्त हो सकता है।
कथा के समापन पर भजन, आरती और भावपूर्ण संकीर्तन ने पूरे पंडाल को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। श्रद्धालु भावविभोर होकर प्रभु श्रीराम के चरणों में नतमस्तक हो गए।

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समिति अध्यक्ष संजीव शर्मा का आभार व्यक्त करता हुआ सुन्दर वक्तव्य

राधे-राधे सेवा समिति के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने श्री राम कथा के सफल आयोजन पर सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और कथा वाचक के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा“यह हमारा सौभाग्य है कि लालकुआँ की पावन भूमि पर प्रभु श्रीराम की कथा सुनने का अवसर मिला। डॉ० पंकज मिश्रा मयंक जी ने जिस सरल, भावपूर्ण और जीवनोपयोगी शैली में कथा का वाचन किया, वह हम सभी के लिए अविस्मरणीय रहेगा।”
उन्होंने कहा कि—
“यह कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का संदेश है। जब तक राम हमारे आचरण में नहीं उतरते, तब तक कथा का पूर्ण फल नहीं मिलता।”
संजीव शर्मा ने समिति के सभी सदस्यों, स्वयंसेवकों, मातृशक्ति, युवाओं एवं नगरवासियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि—“सभी के सहयोग से यह धार्मिक आयोजन सफल हुआ। भविष्य में भी राधे-राधे सेवा समिति समाज में धर्म, संस्कार और सेवा के ऐसे आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाती रहेगी।”
अन्त में उन्होंने प्रभु श्रीराम से नगर, प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

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इस अवसर पर राधे राधे सेवा समिति के अध्यक्ष संजीव शर्मा, मुख्य यजमान कुलदीप मिश्रा, रीना मिश्रा, रामस्वरूप विश्वकर्मा, सुभाष नागर, जीवन कबड़वाल, हरीश नैनवाल, राजेन्द्र अग्निहोत्री, वीएन दुबे, शैलेन्द्र राठौड़, दिनेश पाण्डे मस्तराज सिंहपंकज सिंह, भोलाराम, अनिल सिंह, बैरस्टर राय, दिलीप सिंह, बीएन शर्मा, ओपी अग्निहोत्री, राजेन्द्र पंत, रमाकांत, राजेश मिश्रा, कौशल किशोर, धर्मवीर मौर्या, दुर्गेश शुक्ला, पवन तिवारी, अशोक पाठक, आकाश माथुर, दीपक चतुर्वेदी, शैलेन्द्र सिंह, भुवन रूवाली, अनिल कनौजिया, सर्वेश गंगवार, अनुज शर्मा, महिला टीम में मुख्य रूप से गुड़िया शाह, ऋतु छाबड़ा, रज्जो देवी, मंजीत कौर, सोनी मौर्या, वैशाली मौर्या, पूर्णिमा कश्यप, पूजा कश्यप, पूजा गुप्ता, रोशनी सिंह, रुचि शाह, दीपिका रस्तोगी, रुचि मौर्या, निक्की मौर्या, चरण पादुका की सेवा दे रहे श्री शिव शक्ति सेवा दल की ओर से ओमपाल कश्यप, विक्की कश्यप, शिमरन कश्यप, सर्वेश गंगवारअंजू कश्यप, आनन्द तिवारी धीरज सिंह शाहिद तमाम भक्तगण व सेवादार मौजूद रहे।