ममता, करुणा और आध्यात्म की साक्षात् प्रतिमूर्ति स्व० श्रीमती मीना देवी का देवलोक गमन

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देवभूमि की माटी से जुड़ीं निष्काम कर्मयोगी के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर, 11 अप्रैल को होगा पीपलपानी संस्कार

​हल्द्वानी। ममता, करुणा और वात्सल्य की साक्षात् प्रतिमूर्ति, तथा आध्यात्मिक जगत की महान विभूति स्व० श्रीमती मीना देवी जी अब इस नश्वर संसार में नहीं रहीं। हल्द्वानी के देवलचौड़ क्षेत्र की निवासी, वयोवृद्ध एवं अत्यंत सरल हृदया श्रीमती मीना देवी ने विगत 31 मार्च को 75 वर्ष की आयु में अपनी अनन्त यात्रा की ओर प्रस्थान किया। वह बीते कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं उनके गोलोक गमन की सूचना से समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

​अगाध श्रद्धा और निष्काम कर्म का पर्याय था जीवन

मूल रूप से जनपद अल्मोड़ा के भिकियासैण क्षेत्र की निवासी स्व० मीना देवी जी का संपूर्ण जीवन देवभूमि की पावन संस्कृति और यहाँ के लोक देवी-देवताओं के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रतीक था। लोक-मंगलकारी कार्यों का सृजन करना और निष्काम कर्म की प्रेरणा देकर जीवन पथ को निर्मल आभा से संवारना उनका स्वभाव था। ‘कर्म ही उनका महान आदर्श और दया ही उनका परम धाम था।’
​आत्मा की अमरता और शरीर की नश्वरता के गूढ़ सत्य को भली-भांति समझने वाली इस पुण्यात्मा का अलौकिक सत्ता के प्रति हर पल गहरा रुझान रहा। वे सच्चे अर्थों में दरियादिली और सादगी की जीती-जागती मिसाल थीं। उनका आत्मीय स्वभाव, विनम्रता, स्नेहशीलता और विशाल हृदय हर किसी को अपना बना लेता था। समय-समय पर देवकार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी उनके ईश्वर के प्रति अमिट लगाव को दर्शाती थी।

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​पुत्र भूपेन्द्र सिंह ‘भाईजी’ के रूप में जीवित है माता के सेवाभाव की विरासत

स्व० मीना देवी जी का पूरा जीवन मानवीय मूल्यों की रक्षा हेतु अथक संघर्षों की गाथा रहा है। उन्हीं के दिए गए उत्कृष्ट संस्कारों का ही यह सुखद प्रतिफल है कि उनके सुपुत्र, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता भूपेन्द्र सिंह ‘भाईजी’, आज समाज सेवा के क्षेत्र में एक अग्रणी और अत्यंत सक्रिय नाम हैं।
​अपनी माता से मिली ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ की पावन सीख को आत्मसात कर, भूपेन्द्र सिंह ‘भाईजी’ असहायों, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में मदद से लेकर जनहित के मुद्दों तक, समाज सेवा के हर मोर्चे पर उनकी निस्वार्थ सक्रियता देखने को मिलती है। एक समर्पित समाज सेवक के रूप में उनके द्वारा किए जा रहे लोक-कल्याणकारी कार्य, वास्तव में उनकी माताश्री के सेवाभाव और आदर्शों की ही एक जीवंत गाथा हैं। माता की ही तरह, भाईजी भी समाज के हर तबके के दुख-दर्द में ढाल बनकर खड़े रहते हैं।
​स्व० मीना देवी जी अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। गरीबों के दुख-दर्द में सदैव सहायिका रहने वाली और करुणा की दिव्य छाया बरसाने वाली यह ममतामयी मूर्ति सदैव हमारी स्मृतियों में जीवित रहेगी। दिवंगत आत्मा का ‘पीपलपानी’ संस्कार आगामी 11 अप्रैल को संपन्न होगा। उनकी पावन यादें समाज और उनके परिजनों का सदैव मार्गदर्शन करती रहेंगी।