विशेष संवाद में साझा किए स्वस्थ जीवन के सूत्र; युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को कर रहे प्रेरित
कालाढूंगी / आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ और बढ़ते तनाव के बीच जहां लोग विभिन्न शारीरिक और मानसिक व्याधियों का शिकार हो रहे हैं, वहीं कालाढूंगी क्षेत्र में मनोज पाठक योग के जरिए लोगों को एक स्वस्थ और निरोगी जीवन की ओर प्रेरित करने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। योग को दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य के प्रति एक नई जागरूकता पैदा की है।
मनोज पाठक ने योग के गूढ़ रहस्यों और इसके व्यावहारिक लाभों पर विस्तार से चर्चा की। श्री पाठक ने स्पष्ट किया कि योग केवल कुछ शारीरिक आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा को एकाग्र कर संपूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त करने की एक प्राचीन और प्रामाणिक वैज्ञानिक पद्धति है।
उन्होंने कहा, “आजकल की अनियमित दिनचर्या और खान-पान ने लोगों को बीमारियों की ओर धकेल दिया है। ऐसे में नियमित योगाभ्यास और प्राणायाम ही वह अचूक अस्त्र है, जिससे असाध्य रोगों से बचा जा सकता है और इम्युनिटी को मजबूत किया जा सकता है।”
क्षेत्रवासियों के लिए बने प्रेरणास्रोत
मनोज पाठक कालाढूंगी और आसपास के क्षेत्रों में योग शिविरों और नियमित कक्षाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में युवा जहां तनावमुक्ति और एकाग्रता के गुर सीख रहे हैं, वहीं बुजुर्गों को जोड़ों के दर्द, रक्तचाप और मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में काफी राहत मिल रही है।
मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर
शारीरिक सौष्ठव के साथ-साथ श्री पाठक मानसिक शांति के लिए ध्यान (मेडिटेशन) को भी अपनी योग शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा मानते हैं। उनका मानना है कि एक शांत मन ही स्वस्थ शरीर का निर्माण कर सकता है। उनके इस निस्वार्थ प्रयास से कालाढूंगी क्षेत्र के सैकड़ों लोग अब सुबह उठकर योग करते देखे जा सकते हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि उनका ‘स्वस्थ समाज’ का संकल्प अब एक जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
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