मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आधुनिक मत्स्य क्रांति: नाबार्ड की पहल से अभिषेक खनवाल बने पर्वतीय ट्राउट मत्स्य पालन की नई पहचान

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक कृषि एवं मत्स्य आधारित उद्यमों को बढ़ावा देकर युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्य कर रही है। राज्य सरकार की इसी दूरदर्शी सोच और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से जनपद नैनीताल में आधुनिक रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) आधारित ट्राउट मत्स्य पालन आज ग्रामीण युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया मॉडल बनकर उभर रहा है।

इसी पहल का सफल उदाहरण रामगढ़ विकासखंड के बोहराकोट निवासी युवा मत्स्य पालक श्री अभिषेक खनवाल हैं, जिन्होंने आधुनिक तकनीक को अपनाकर पर्वतीय क्षेत्र में ट्राउट मत्स्य पालन की नई मिसाल प्रस्तुत की है।

*भारतीय शीतजल मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-DCFR), भीमताल द्वारा नाबार्ड के फार्म सेक्टर प्रमोशन फंड (FSPF) के अंतर्गत ₹25 लाख की अनुदान सहायता से स्थापित* आधुनिक हाइब्रिड RAS यूनिट ने अभिषेक खनवाल के स्वरोजगार को नई दिशा प्रदान की है।
इस परियोजना के अंतर्गत उनके यहां दो नर्सरी टैंक एवं दो ग्रो-आउट टैंक स्थापित किए गए हैं, जिनकी उत्पादन क्षमता प्रति चक्र लगभग *800 से 1000 किलोग्राम रेनबो ट्राउट है।* यह अत्याधुनिक प्रणाली सीमित जल उपलब्धता में भी सफलतापूर्वक मत्स्य उत्पादन करने में सक्षम है तथा पारंपरिक प्रणाली की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत तक जल की बचत करती है।
परंपरागत ट्राउट पालन में जहां लगभग 600 लीटर प्रति मिनट जल प्रवाह की आवश्यकता होती है, वहीं आधुनिक RAS प्रणाली में मात्र 100 से 150 लीटर प्रति मिनट जल से उत्पादन संभव हो रहा है। साथ ही ऊर्जा की कम खपत, कम लागत, निष्क्रिय निस्पंदन प्रणाली तथा बिजली बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था जैसी विशेषताओं ने इसे पर्वतीय क्षेत्रों के छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी बना दिया है।

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अभिषेक खनवाल को परियोजना के अंतर्गत मत्स्य बीज, तकनीकी प्रशिक्षण एवं विशेषज्ञों का निरंतर मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया गया। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाने के कारण उनकी इकाई से उत्कृष्ट गुणवत्ता का ट्राउट उत्पादन होने की संभावना है। परियोजना का लागत-लाभ अनुपात 1.88 तथा पूंजी निवेश की वापसी अवधि लगभग एक वर्ष आंकी गई है, जो इसकी आर्थिक सफलता को दर्शाती है।

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अभिषेक खनवाल का कहना है कि यदि नाबार्ड, ICAR-DCFR और राज्य सरकार का सहयोग नहीं मिलता तो इतनी आधुनिक तकनीक के साथ मत्स्य पालन शुरू करना संभव नहीं था। आज उन्हें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में वे अपने उद्यम का विस्तार करते हुए अन्य युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा सकेंगे।

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*मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास आज धरातल पर सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। नाबार्ड जैसी संस्थाओं के सहयोग से संचालित ऐसी परियोजनाएं न केवल किसानों और युवाओं की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” के संकल्प को भी नई मजबूती प्रदान कर रही हैं।*

*अभिषेक खनवाल की सफलता यह साबित करती है कि सरकार का सहयोग, आधुनिक तकनीक और युवाओं का संकल्प मिलकर पर्वतीय क्षेत्रों में भी रोजगार, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकते हैं।*

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