ऐपण, मोमबत्ती और सिल्क कुकून का अनोखा जादू: यूनिवर्सल कान्वेंट में बच्चों ने ऐसा क्या रचा कि सब रह गए हैरान?

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वस्त्र मंत्रालय की तीन-दिवसीय ‘कौशलबोध कार्यशाला’ में नन्हे हाथों ने पारंपरिक लोककला और हुनर का दिखाया अद्भुत संगम
हल्द्वानी। विशेष संवाददाता
यूनिवर्सल कान्वेंट सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में आयोजित तीन-दिवसीय ‘कौशलबोध कार्यशाला’ में उस समय हर कोई दंग रह गया, जब कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों ने अपनी उंगलियों के जादू से पारंपरिक लोककला और आधुनिक शिल्प का अनूठा संसार गढ़ दिया। वस्त्र मंत्रालय (भारत सरकार) के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के तत्वावधान में आयोजित इस शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम का कुशल संचालन हस्तशिल्प सेवा केन्द्र अल्मोड़ा की हस्तशिल्प संवर्धन अधिकारी श्रीमती भूमिका गर्ब्याल द्वारा किया गया।
20 से 22 अगस्त 2026 तक चली इस कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर्स ने बच्चों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा को तराशने का काम किया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान मास्टर ट्रेनर श्रीमती स्मृति आर्या ने सिल्क कुकून शिल्प, श्रीमती सीमा ने कलात्मक मोमबत्ती निर्माण, श्रीमती जूली आर्या ने पेंटिंग तथा सुश्री पूजा आर्या ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध पारंपरिक ‘ऐपण’ कला की बारीकियों और व्यावहारिक पहलुओं से विद्यार्थियों को रूबरू कराया।
समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने कार्यशाला के दौरान सीखे गए हुनर से तैयार कलाकृतियों का आत्मविश्वास के साथ शानदार प्रदर्शन किया। विद्यालय परिवार ने सभी प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और कार्य-कौशल को निखारने के साथ-साथ उन्हें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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