नए सफ़र की दहलीज पर . . . माँ अवंतिका का आशीर्वाद और पावन पुस्तक की सौगात

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नए सफ़र की दहलीज पर . . . माँ अवंतिका का आशीर्वाद और पावन पुस्तक की सौगात
लालकुआँ सेंचुरी मिल से अपने जीवन के एक सुनहरे अध्याय को पूरा कर विदा हो रहे श्रद्धालुओं के लिए आज का दिन बेहद भावुक और आध्यात्मिक रहा। जीवन की एक नई राह पर कदम बढ़ाने से पहले, इन भक्तों ने आदि शक्ति माँ अवंतिका देवी के दरबार में पूरी श्रद्धा के साथ शीश नवाया। मंदिर प्रांगण में भक्ति का एक अनुपम प्रवाह देखने को मिला, जहां अनेकों ने माँ की विशेष पूजा-अर्चना की और अपने आगामी जीवन के मार्ग के लिए शक्ति, संबल और ईश्वरीय आशीर्वाद की प्रार्थना की।
इस पावन वेला पर मुख्य आचार्य चंद्र शेखर जोशी ने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई। इसके बाद, मंदिर समिति के सम्मानित अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खाती ने विदा हो रहे भक्तों को माँ की पवित्र चुनरी ओढ़ाई और ‘आदि शक्ति माँ अवंतिका’ नामक पुस्तक भेंट स्वरूप प्रदान की। उन्होंने अत्यंत आत्मीयता के साथ सभी के उज्ज्वल और सफल भविष्य की मंगलकामना की।
इन्हीं भावुक क्षणों के बीच, सेंचुरी मिल से विदा ले चुके माँ के अनन्य भक्त पान सिंह बिष्ट ने अतीत के पन्नों को याद करते हुए माँ की अलौकिक महिमा का बखान किया। उन्होंने भावुक होकर बताया कि जब जीवन में उन्हें पहली बार वेतन मिला था, तब सबसे पहले उन्होंने माँ के चरणों में ही प्रसाद अर्पित कर उनका आभार जताया था। आज इस विदाई की बेला में एक बार फिर माँ का पावन आशीर्वाद पाकर वे खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं।
भक्ति, प्रेम और सद्भाव के इस विशेष अवसर पर शशि कुमार सिंह रावत, आनंद सिंह रजवार, नवीन सती, वीरेंद्र सिंह और महेंद्र रौतेला सहित कई अन्य साथी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक-दूसरे को स्नेहपूर्वक विदा करते हुए शुभकामनाएं दीं।