हल्द्वानी (विशेष रिपोर्ट): सनातन धर्म के ग्रंथ और पुराण रहस्यों के अथाह सागर हैं। जब भी हम संकटमोचन श्री हनुमान जी का स्मरण करते हैं, तो हमारे मन में एक बाल ब्रह्मचारी और माता अंजनी के इकलौते पुत्र की छवि उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रुद्रावतार बजरंगबली इकलौते नहीं थे? ब्रह्मांड पुराण के पन्नों में एक ऐसा गूढ़ रहस्य छिपा है, जिससे अधिकांश श्रद्धालु आज भी अनजान हैं।
शास्त्रों के अनुसार, वानरराज केसरी और माता अंजनी के एक नहीं, बल्कि छह पुत्र थे, जिनमें श्री हनुमान जी सबसे ज्येष्ठ (बड़े) थे। जहाँ बजरंगबली ने आजन्म ब्रह्मचर्य का पालन किया और शिव अंश के रूप में अमरता प्राप्त की, वहीं उनके अन्य पाँच अनुज (छोटे भाई) विवाहित थे और उनका भरा-पूरा परिवार था। पुराणों में स्पष्ट उल्लेख है कि इन पाँच भाइयों का स्मरण और पूजन करने से मानव जीवन में विशेष और दुर्लभ सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
कौन हैं हनुमान जी के पाँच भाई और क्या है उनका महत्व?
ब्रह्मांड पुराण के उपोद्घात पाद (अध्याय 7) में इन पाँचों भाइयों के नामों और उनके गुणों का विस्तृत वर्णन मिलता है। इनके नामों का मानसिक स्मरण मात्र साधक को अलौकिक शक्तियों से भर देता है। जानिए इन पांच शक्तियों के बारे में:
मतिमान (कुशाग्र बुद्धि की सिद्धि): हनुमान जी के ठीक छोटे भाई मतिमान का स्मरण करने से साधक को कुशाग्र बुद्धि, विवेक और विपरीत परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की असाधारण क्षमता प्राप्त होती है।
श्रुतिमान (ज्ञान और एकाग्रता की सिद्धि): श्रुतिमान जी का ध्यान करने से शास्त्रों का गूढ़ ज्ञान सुलभ हो जाता है। विशेषकर विद्यार्थियों और ज्ञान पिपासुओं के लिए इनका स्मरण अचूक एकाग्रता और ‘श्रवण शक्ति’ (सुनकर याद रखने की क्षमता) प्रदान करता है।
केतुमान (यश, कीर्ति और विजय की सिद्धि): ‘केतु’ का अर्थ है ध्वजा। जीवन में बार-बार असफल होने वाले व्यक्ति यदि केतुमान जी का स्मरण करें, तो उनकी कीर्ति पताका दसों दिशाओं में फहराती है। यह नेतृत्व क्षमता और विजयश्री का आशीर्वाद देते हैं।
गतिमान (निर्बाध प्रगति और स्फूर्ति की सिद्धि): यदि कार्यों में अकारण रुकावट आ रही हो, तो गतिमान जी की वंदना से शारीरिक स्फूर्ति मिलती है, आलस्य दूर होता है और जीवन में रुके हुए कार्यों को निर्बाध गति (प्रगति) प्राप्त होती है।
धृतिमान (धैर्य और असीम साहस की सिद्धि): ‘धृति’ अर्थात् संतोष और धैर्य। विषम परिस्थितियों में धृतिमान जी का स्मरण व्यक्ति के भीतर असीम धैर्य और साहस का संचार करता है, जिससे वह बड़े से बड़े संकट में भी अपने संकल्प पर अडिग रहता है।
पूर्णता की ओर ले जाती है यह साधना
श्री हनुमान जी जहाँ अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता हैं, वहीं उनके ये पाँच भाई मति (बुद्धि), श्रुति (ज्ञान), केतु (यश), गति (प्रगति), और धृति (धैर्य) मानव जीवन की सबसे अनिवार्य सिद्धियों के साक्षात स्वरूप हैं।
आध्यात्मिक जानकारों का मानना है कि यदि भक्त बजरंगबली की उपासना के साथ-साथ वानरराज केसरी, माता अंजनी और मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान व धृतिमान का मानसिक स्मरण करते हैं, तो उनकी साधना पूर्ण फलदायी होती है। ब्रह्मांड पुराण का यह रहस्यमयी प्रसंग इस बात का प्रमाण है कि हमारी पौराणिक कथाएं केवल इतिहास नहीं हैं, बल्कि जीवन को हर दिशा में सफल और सिद्ध बनाने के अचूक सूत्र भी हैं।
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