नौतपा: जब सूर्य उगलता है आग, जानिए इसका ज्योतिषीय, वैज्ञानिक महत्व और बचाव के उपाय
ज्येष्ठ मास की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच हर वर्ष ‘नौतपा’ का आगमन होता है। यह वह समय होता है जब सूर्य देव अपने सबसे उग्र रूप में होते हैं और धरती मानो भट्टी की तरह तपने लगती है। ज्योतिष और मौसम विज्ञान, दोनों ही दृष्टिकोणों से गर्मी के इन 9 दिनों का विशेष महत्व माना गया है।
क्या है नौतपा?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य कृतिका नक्षत्र से निकलकर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके शुरुआती 9 दिनों को ‘नौतपा’ कहा जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिसके कारण तापमान अपने चरम पर पहुंच जाता है और भीषण लू चलती है।
अच्छी बारिश का पारंपरिक संकेत
भारतीय जनमानस और विशेषकर कृषक वर्ग के बीच नौतपा को लेकर एक पुरानी मान्यता गहराई से जुड़ी है कि “नौतपा जितना अधिक तपेगा, बारिश उतनी ही अच्छी होगी।” पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों की भीषण गर्मी समुद्र के पानी का वाष्पीकरण तेजी से करती है, जिससे मजबूत बादलों का निर्माण होता है और आगामी मानसून के दौरान शानदार वर्षा होती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विज्ञान के अनुसार, इस समयावधि में सूर्य की किरणें कर्क रेखा के बहुत करीब होती हैं और पृथ्वी पर लगभग सीधी पड़ती हैं। इसके परिणामस्वरूप दिन बड़े होते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। सीधी किरणों और बादलों की अनुपस्थिति के कारण वायुमंडल का तापमान तेजी से बढ़ता है। इसे मानसून के आने से पहले की एक आवश्यक प्राकृतिक और मौसमी प्रक्रिया के रूप में भी देखा जाता है।
नौतपा में रखें स्वास्थ्य का विशेष ख्याल
खुद को हाइड्रेटेड रखें
दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें। छाछ, लस्सी, नीबू पानी, बेल का शरबत और नारियल पानी का सेवन विशेष लाभदायक होता है।
सीधी धूप से बचें
दोपहर के समय, विशेषकर 12 बजे से 4 बजे के बीच, अति आवश्यक कार्य न होने पर घरों से बाहर निकलने से बचें। बाहर निकलते समय सिर और चेहरे को सूती कपड़े से ढकें।
हल्के कपड़ों का चुनाव
सूती, ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनें, जिससे पसीना सूखने में मदद मिले और शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।
खान-पान में बदलाव
तरबूज, खरबूजा, ककड़ी और खीरा जैसे पानी वाले मौसमी फलों का सेवन बढ़ाएं। अधिक मसालेदार, गरिष्ठ और तले-भुने भोजन से पूरी तरह परहेज करें।
नौतपा प्रकृति के संतुलन और आगामी मानसूनी वर्षा की तैयारी का एक अहम हिस्सा है। इस दौरान थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता अपनाकर हम न केवल इस भीषण गर्मी का सुरक्षित सामना कर सकते हैं, बल्कि स्वस्थ भी रह सकते हैं।
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