लालकुआँ / हल्दूचौड़।
गौ आश्रम परमा हल्दूचौड़ स्थित श्रील् नित्यानंद पाद आश्रम, श्री गौर राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित 1100 अखण्ड श्रीमद्भागवत कथा का अलौकिक आध्यात्मिक अनुष्ठान निरंतर जारी है। इस विराट धार्मिक आयोजन को लेकर समूचे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का वातावरण बना हुआ है। भक्तजन बड़ी संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
आश्रम के व्यवस्थापक श्री रामेश्वर दास महाराज ने बताया कि भगवान श्री बद्रीनाथ की असीम कृपा से उन्हें इस दिव्य आयोजन को करने की प्रेरणा प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम आध्यात्मिक जगत में अपने आप में एक अद्वितीय संकल्प है, जिसके अंतर्गत 1100 अखण्ड श्रीमद्भागवत कथाओं का आयोजन किया जा रहा है। निरंतर मूल पाठ के साथ इन कथाओं के संपन्न होने में लगभग नौ वर्षों का समय लगेगा। वर्तमान में इस श्रृंखला की 427वीं कथा चल रही है।
उन्होंने बताया कि इस महान धार्मिक अनुष्ठान को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए सुखताल से विद्वान ब्राह्मणों का दल यहां आमंत्रित किया गया है, जो निरंतर भागवत पाठ और कथा का आयोजन कर रहे हैं।
स्वामी रामेश्वर दास महाराज ने कथा के दौरान कहा कि ईश्वरीय प्रेम के बिना मानवीय जीवन का कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि धन का अत्यधिक मोह मनुष्य को अंधा बना देता है, इसलिए व्यक्ति को लोभ से ऊपर उठकर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का पात्र बनने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को सन्मार्ग की प्रेरणा देती है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ते हुए ईश्वरीय शक्ति का साक्षात्कार कराती है। उनके अनुसार कलियुग में भागवत कथा कामधेनु के समान है, क्योंकि इस युग में राम नाम का स्मरण और भागवत कथा का श्रवण मात्र ही मनुष्य को जीवन के कष्टों से मुक्ति दिलाकर उसके जीवन को धन्य बना सकता है।
महाराज ने कर्म की शुद्धता पर विशेष बल देते हुए कहा कि जितनी अधिक कर्म की शुद्धता होगी, भगवान उतनी ही अधिक कृपा भक्त पर करेंगे। कर्म करना मनुष्य के वश में है, इसलिए व्यक्ति को निरंतर अपने कर्तव्य का पालन करते रहना चाहिए और अपने सभी कर्मों को भगवान श्रीराम के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत अत्यंत पावन पुराण है, जो भगवत्स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार माना जाता है। यह संसार रूपी भवसागर में फंसे हुए प्राणियों को पार लगाने वाला दिव्य ग्रंथ है। श्रीमद्भागवत कथा हमें जीवन जीने की सच्ची कला सिखाती है और मानव को धर्म, भक्ति तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
आश्रम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का श्रवण कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना हुआ है। यह अनूठा आयोजन आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना और धर्म जागरण का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहेगा।
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