हल्दूचौड़
हल्दूचौड़ के डूंगरपूर स्थित कालिका मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पाँचवें दिन प्रसिद्ध कथा वाचक भागवताचार्य नमन कृष्ण महाराज ने योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का अत्यंत मधुर, भावपूर्ण एवं सरस शैली में वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
महाराज जी ने श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की विभिन्न लीलाओं—माखन चोरी, ग्वाल-बालों के साथ उनकी स्नेहमयी चेष्टाएँ तथा माता यशोदा के साथ उनके वात्सल्यपूर्ण प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान की ये लीलाएँ केवल मनोरंजक प्रसंग नहीं, बल्कि मानव जीवन को प्रेम, सरलता, निष्कपटता और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का श्रवण मन को निर्मल बनाता है और भक्त के भीतर ईश्वर के प्रति सहज प्रेम उत्पन्न करता है।
कथा के क्रम में भागवताचार्य नमन कृष्ण महाराज ने राधा तत्व की महिमा का भी अत्यंत गूढ़ और प्रेरणादायक वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराधा केवल एक नाम नहीं, बल्कि भक्ति की सर्वोच्च पराकाष्ठा का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि श्रीराधा भगवान श्रीकृष्ण की परा शक्ति स्वरूपा हैं और राधा-कृष्ण का संबंध आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। राधा तत्व को समझे बिना श्रीकृष्ण भक्ति पूर्ण नहीं मानी जाती।
महाराज जी ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे कथा श्रवण के साथ-साथ उसके संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करें, जिससे जीवन में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस अवसर पर कथा स्थल पर यजमान परिवार सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्तजन उपस्थित रहे और श्रद्धा-भाव से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। कथा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष संचार देखने को मिला।
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