श्रीराम कथा के प्रथम दिवस रामनाम की गूंज से भाव-विभोर हुआ लालकुआँ डा० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ ने रामकथा के महात्म्य व काशी व द्रविड़ नरेश प्रसंग से बांधा श्रद्धालुओं को

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लालकुआँ। राधे–राधे सेवा समिति के तत्वावधान में 25 एकड़ कॉलोनी रोड, भोला मंदिर के सामने आयोजित श्रीराम कथा के प्रथम दिवस कथा पंडाल श्रद्धा, भक्ति और रामनाम की मधुर गूंज से सराबोर हो उठा। सुप्रसिद्ध कथावाचक डा० पंकज मिश्रा ‘मयंक’ ने प्रथम दिन की कथा में श्रीराम कथा के महात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रोताओं को आध्यात्मिक रस में डुबो दिया।

कथावाचक डा० मयंक ने कहा कि श्रीराम कथा केवल एक कथा नहीं, अपितु जीवन जीने की दिव्य कला है, जो मानव को मर्यादा, करुणा, सत्य और धर्म के मार्ग पर अग्रसर करती है। रामकथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन के क्लेश दूर होते हैं और अंतःकरण में भक्ति का प्रकाश प्रकट होता है। उन्होंने बताया कि कलियुग में रामनाम ही सबसे सरल और प्रभावी साधना है, जिससे जीवन की दिशा और दशा दोनों परिवर्तित होती हैं।

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कथा के क्रम में डा० मिश्रा ने काशी नरेश एवं  (द्रविण) नरेश के अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन किया। कथावाचक ने समझाया कि ज्ञान अहंकार का कारण बने तो वह अधूरा है, किंतु जब ज्ञान भक्ति से जुड़ता है, तब वह मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। काशी नरेश द्रविड़ नरेश ने रामनाम को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि बिना भक्ति के विद्या शुष्क होती है, जबकि भक्ति से युक्त विद्या अमृत बन जाती है। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।

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इस अवसर पर आयोजन समिति से संजीव शर्मा, उमेश तिवारी, कुलदीप मिश्रा, पत्रकार शैलेंद्र सिंह, हरीश नैनवाल, अशोक पाठक, धर्मवीर मौर्य, राजेन्द्र प्रसाद अग्निहोत्री दुर्गेश, बबलू सिंह, जेपी सिंह, व्यापार मंडल अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट, सभासद हेमंत पांडे, डॉ राजकुमार सेतिया, पंकज सिंह, संतोष बाबू कश्यप, ओमपाल कश्यप, जटाशंकर मिश्रा, प्रेम नाथ पंडित, अरुण जोशी, नारायण बिष्ट, पवन चौहान, श्रीमती बीना जोशी, नंदी उप्रेती, गीता भट्ट, यमुना नैनवाल, मुन्नी पांडे, रितु छाबड़ा, रजनी सिंह, राजलक्ष्मी पंडित, किरन सेतिया, दीपा पांडे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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प्रथम दिवस की कथा ने क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित करते हुए श्रद्धालुओं के हृदय में रामभक्ति की अमिट छाप छोड़ दी।

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