कवि-कथाकार अनिल कार्की को मिलेगा ‘चन्द्रकुंवर बर्त्वाल पुरस्कार-2025’

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० जगमोहन रौतेला
हल्द्वानी – उत्तराखण्ड भाषा संस्थान, देहरादून द्वारा ‘उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ के अंतर्गत हिन्दी भाषा के चर्चित कवि-कथाकार डॉ. अनिल कार्की को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित ‘चन्द्रकुंवर बर्त्वाल पुरस्कार’ प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। यह पुरस्कार साहित्य सृजन, सेवा एवं साहित्यिक योगदान के लिए दिया जाता है। जिसमें 50,000 रुपये (पचास हजार), सम्मान-चिह्न, सम्मान-पत्र और अंगवस्त्र शामिल हैं। उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की निदेशक मायावती ढकरियाल ने इस सम्बंध में पत्र के माध्यम से डॉ. अनिल कार्की को सूचित किया है।
निदेशक मायावती ढकरियाल के अनुसार, अलंकरण समारोह आगामी 30 मार्च 2026 (सोमवार) को मुख्य सेवक सदन (मुख्यमन्त्री कार्यालय) न्यू कैन्ट रोड, देहरादून में आयोजित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिथौरागढ़ जिले के पीपलतड़ गाँव में 20 जून 1986 को जन्मे डॉ. अनिल कार्की वर्तमान में उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में हिन्दी विभाग के सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। हिंदी लेखन में कुमाउनी शब्दावली के जीवंत प्रयोग के संस्थापकों में वे अग्रणी हैं। इन प्रयोगों ने हिन्दी को पहाड़ी लोक-आत्मा से समृद्ध किया है।
डॉ. कार्की की अब तक एक दर्जन से अधिक किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रमुख किताबों में कविता संग्रह-‘उदास बखतों का रमोलिया’, ‘पलायन से पहले’, नदी भेड़ नहीं होती’,’ सुन सुवा बणखण्डी’। कहानी संग्रह- ‘भ्यास कथा तथा अन्य कहानियाँ, धार का गिदार। संस्मरण- ‘अपनी माटी अपना बचपन’, ‘महासीर के मुलुक से’ शामिल हैं। उन्होंने तीन किताबों ‘एक तारो दूर चलक्यो’, ‘लोक पहरुवे” हाशिए का हिमाल’ का सम्पादन भी किया है।
डॉ. कार्की का साहित्य विद्रोह, संघर्ष, बेचैनी, रूमानियत एवं यथार्थ का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। सैनिकों, आम घसियारिनों, कामगारों के जीवन की हकीकत बयां करने वाली कविताएँ व कहानियाँ अत्यंत मार्मिक हैं। कार्की के लेखन में लोक संस्कृति के क्षय, पर्यावरणीय संकट एवं सामाजिक विडम्बनाओं से उपजी त्रासदी भी देखने को मिलती है।
डॉ. कार्की को उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ के अंतर्गत चन्द्रकुंवर बर्त्वाल पुरस्कार-2025 दिए जाने की घोषणा पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन लोहनी, प्रसिद्ध कथाकार लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही, अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. देव सिंह पोखरिया, प्रो. दिवा भट्ट, कुमाऊॅ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. शिरीष कुमार मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला, मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ.शशांक शुक्ला, , डॉ. राजेंद्र कैड़ा, ओपी पाण्डे, डॉ. हयात सिंह रावत, डॉ. हरिसुमन बिष्ट, प्रो. गिरिजा पाण्डे, आभा गरखाल बोहरा, पूरन सिंह बिष्ट, प्रो. राकेश रयाल, प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण, बची सिंह बिष्ट, डॉ. खेमकरन सोमन, कथाकार मुकेश नौटियाल, शंकर दत्त जोशी, राजेन्द्र सौन, विकास जोशी, राजेश प्रसाद, राजेन्द्र क्वीरा, आनन्द बसेड़ा, राजुल पनेरु, दीपक पनेरु, प्रमोद जोशी ने बधाई देते हुए उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।