लालकुआँ। उत्तरायणी मेले को लेकर लालकुआँ में उत्साह अपने चरम पर है। इसी क्रम में नगर की मातृ शक्तियों ने चाय की चुस्कियों के बीच उत्तरायणी मेले की तैयारियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों को लेकर जबरदस्त चर्चा की। यह अनौपचारिक बैठक आत्मीयता, विचार-विमर्श और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत रही।
चाय की महक और संवाद की गर्माहट के बीच मातृ शक्तियों ने मेले के आयोजन, परंपराओं के संरक्षण और अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर अपने-अपने विचार रखे। सभी ने एक स्वर में कहा कि उत्तरायणी मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी लोकसंस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
चर्चा के दौरान महिलाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक आयोजनों को भव्य बनाने पर विशेष जोर दिया। साथ ही यह भी तय हुआ कि घर-घर जाकर लोगों को मेले में आने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
मातृ शक्तियों का कहना था कि ऐसे संवाद न केवल आयोजन को मजबूत बनाते हैं, बल्कि समाज को जोड़ने का भी कार्य करते हैं। चाय पर हुई यह चर्चा उत्तरायणी मेले के प्रति बढ़ते उत्साह और सामूहिक जिम्मेदारी का सुंदर उदाहरण बनी।
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