लालकुआं (नैनीताल)। शनिवार की सांय अचानक हृदय गति रुकने से क्षेत्र के लोकप्रिय समाजसेवी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और जन-जन के प्रिय व्यक्तित्व पूरन सिंह रजवार का निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन से लालकुआं ही नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है। हर आंख नम है और हर दिल उनके स्नेह, संघर्ष और सेवा की यादों से भरा हुआ है।
लगभग 40 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी के निष्ठावान और सक्रिय कार्यकर्ता रहे पूरन सिंह रजवार ने राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम बनाया। अस्सी के दशक की शुरुआत में यूथ कांग्रेस से जुड़े श्री रजवार ने नगर अध्यक्ष से लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष तक का सफर ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ तय किया। वे दो बार लालकुआं नगर पंचायत से निर्विरोध सभासद चुने गए और कार्यवाहक चेयरमैन के रूप में भी उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।
पूर्व सांसद के. सी. सिंह बाबा के दोनों कार्यकाल में लोकप्रिय सांसद प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने आम जनता की समस्याओं को न सिर्फ सुना, बल्कि उन्हें समाधान तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया। समाजसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय रहा। बीते 30 वर्षों से आदर्श रामलीला कमेटी लालकुआं के मेला प्रबंधक के रूप में तथा वर्ष 2008 से उत्तरायणी मेला लालकुआं के प्रमुख सूत्रधार के रूप में उन्होंने कुमाऊंनी संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में अमिट भूमिका निभाई।
वर्तमान में वे माँ अवंतिका मंदिर समिति के अध्यक्ष भी थे। उनकी कुशल देखरेख और नेतृत्व में मंदिर निरंतर विकास की ओर अग्रसर था और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में उनका योगदान समान रूप से स्मरणीय रहेगा।
उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। आंदोलन के दौरान उन्होंने कई बार संघर्ष झेला, जनसभाएं आयोजित कीं और उत्तराखण्ड की अस्मिता के लिए सड़कों पर उतरकर अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की।
हाल के दिनों में नगर निकाय चुनावों को लेकर जब लालकुआं में राजनीतिक हलचल तेज थी, तब सामान्य सीट की स्थिति में उन्हें कांग्रेस पार्टी का सर्वमान्य और सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था। उनका सपना था कि लालकुआं नगर पंचायत क्षेत्र को सम्पूर्ण विकास का एक आदर्श मॉडल बनाया जाए। ट्रांसपोर्ट नगर, आवासीय कॉलोनियां, महाविद्यालय, भूमि का मालिकाना हक, युवाओं को रोजगार, नागरिक पार्क और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार जैसे अनेक कार्य उनके विजन का हिस्सा थे। वे अक्सर कहा करते थे “एक चुनें, नेक चुनें, छोड़ो बाकी उलझनें।”
आज जब पूरन सिंह रजवार हमारे बीच नहीं हैं, तब भी उनके विचार, उनका संघर्ष और उनकी सेवा की सुगंध सदैव लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। लालकुआं ने अपना एक सच्चा सपूत खो दिया है, पर उनकी स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों को सेवा, समर्पण और संस्कार की प्रेरणा देती रहेंगी।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -
👉 वॉट्स्ऐप पर हमारे समाचार ग्रुप से जुड़ें
